ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड ने गुलाबी गेंद से दिन रात के टेस्ट मैचों में रूचि दिखाई है लेकिन भारत ने इस ओर अभी तक कोई विशेष पहल नहीं की है। भारत में पिछले साल ग्रेटर नोएडा में गुलाबी गेंद में दलीप ट्राफी के सभी मैचों का आयोजन किया था।
भारत को गुलाबी गेंद से क्रिकेट पर क्यों है ऐतराज?
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दिलीप ट्रॉफी
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इसके बाद से बीसीसीआई ने इस दिशा में कोई बड़ा कदम नहीं उठाया है। लोधा पैनल की सिफारिश के बाद कानूनी विवाद इसके पीछे की वजह हो सकती है। पूर्व प्रेसीडेंट अनुराग ठाकुर और पूर्व सचिव अनुराग शिर्के ने ने हालांकि इसमें दिलचस्पी दिखाई थी। बाद में इन्हें अपने पद से हटना पड़ा। दलीप ट्राफी के बाद बीसीसीआई ने इस पर किसी खिलाड़ी या कप्तान से इस पर बात नहीं की है।
भारत को गुलाबी गेंद से क्रिकेट पर क्यों है ऐतराज?
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पिंक बॉल
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गौर हो कि 2007 के दौर में टी-20 को देश में ज्यादा लोकप्रियता नहीं मिली थी लेकिन बाद में भारत में ही आईपीएल के रूप में टी-20 सबसे ज्यादा लोकप्रिय हुआ है। गुलाबी गेंद का क्रिकेट भी कहीं इसी तरह बाद में यहां सर्वाधिक लोकप्रिय ना हो जाए। हालांकि अभी इसकी शुरुआत में काफी आशंका के बादल नजर आ रहे हैं।
भारत को गुलाबी गेंद से क्रिकेट पर क्यों है ऐतराज?
बोर्ड के एक अधिकारी कहते हैं कि देश में क्रिकेट विभिन्न परिस्थितियों में खेला जाता है। लिहाजा गुलाबी गेंद से यहां क्रिकेट खेल एक मुश्किल कवायद है। वैसे कहा जा रहा है कि गुलाबी गेंद के क्रिकेट का भविष्य अब सौरव गांगुली के हाथों में है। वह अगर आवश्यक समझेंगे तो देश में गुलाबी गेंद से क्रिकेट के मैच करा सकते हैं। गांगुली बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। उन्होंने कोलकाता में स्थानीय स्तर पर गुलाबी गेंद से क्रिकेट के मैच आयोजित करवा चुके हैं।
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गुलाबी गेंद
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बोर्ड ने गुलाबी गेंद की निर्माता कंपनियों से भी किसी तरह की बात नहीं की है। इन कंपनियो को पिछले सीजन में काफी अधिक संख्या में गुलाबी गेंद बनाने के लिए कहा गया था। लेकिन अभी तक इन कंपनियों को किसी तरह का आर्डर नहीं दिया गया है।