टीम इंडिया की जर्सी पर अब ओप्पो इंडिया लिखा नजर नहीं आएगा, बल्कि ओप्पो की जगह लिखा होगा बायजू इंडिया। चाइनीज मोबाईल कंपनी ओप्पो ने टीम इंडिया के साथ किए अपने स्पांसर करार को बायजू को बेच दिया है। साल 2017 में ओप्पो ने विवो को नीलामी में पछाड़कर यह करार हासिल किया था। वेस्टइंडीज दौरे के बाद भारतीय टीम के खिलाड़ियों की जर्सी पर बायजू लिखा नजर आएगा।
टीम इंडिया की जर्सी पर कई कंपनियों को जगह मिली है, जिसके लिए उन्हें बीसीसीआई को मोटी रकम का भुगतान करना पड़ा है। पिछले बीस सालों में स्पांसर से बोर्ड ने खूब पैसे कमाए हैं, लेकिन ओप्पो के साथ उसका यह अब तक सबसे महंगा करार था। आइए जानते हैं कि 2000 से लेकर 2019 तक कितनी कंपनियों ने टीम इंडिया को स्पांसर किया और इसके लिए उन्हें बोर्ड को कितनी रकम का भुगतान करना पड़ा...
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आईटीसी लोगो
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साल 1999 से लेकर 2000 तक टीम इंडिया की जर्सी पर आईटीसी लिमिटेड का नाम दिखता था। आईटीसी तब एक टेस्ट मैच के लिए 22 लाख और वनडे मैच के लिए 17.5 लाख रुपये का भुगतान करती थी। 2000 में एक फिर से आईटीसी ने बीसीसीआई के साथ दो साल के लिए नया अनुबंध किया। जिसके तहत टेस्ट के लिए 35 लाख और वनडे के लिए 30 लाख रुपये प्रति मैच देना मंजूर हुआ।
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सचिन तेंदुलकर
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2002 में आईटीसी का अनुबंध समाप्त होने के बाद टीम इंडिया का नया स्पांसर सहारा बना। सहारा के साथ सात साल तक के लिए करार हुआ और 2002 से लेकर 2009 तक सहारा टीम इंडिया की नीली जर्सी पर दिखता रहा। इसकी अनुबंध की इतनी कड़ी शर्तें रहीं कि इस अवधि के लिए हुए करार की रकम का खुलासा नहीं हुआ।
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टीम इंडिया जर्सी
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2009 से 2012 के लिए दूसरी बार भी सहारा ही टीम इंडिया को स्पांसर रहा। इस अवधि के लिए उसने बीसीसीआई को टेस्ट के लिए 1.91 करोड़ और वनडे के लिए 2.09 करोड़ रुपये देना तय किया। 2012 में अनुबंध खत्म होने के बाद सहारा ने तीसरी बार भी स्पांसरशिप जारी रखी। इस सत्र के लिए उसने प्रति मैच 3.34 करोड़ रुपये बीसीसीआई को देने का अनुबंध किया।
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टीम इंडिया जर्सी
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साल 2014 में बीसीसीआई के साथ सहारा का अनुबंध खत्म हो गया और टीम इंडिया का नया स्पांसर बना स्टार। स्टार समूह ने बीसीसीआई को 1.92 करोड़ व आईसीसी एवं एशियन क्रिकेट काउंसिल के मैचों के लिए 80 लाख रुपये के करार के साथ टीम इंडिया की जर्सी पर अपना नाम छपवाया।