टीम इंडिया के तेज गेंदबाज एस श्रीसंत को शुक्रवार को बड़ी राहत मिली। सुप्रीम कोर्ट ने श्रीसंत पर स्पॉट फिक्सिंग के कारण लगे आजीवन प्रतिबंध को खत्म कर दिया है। श्रीसंत न्याय पाने के लिए लगातार लड़ते रहे और इस दौरान वह दूसरे देश से खेलने का मन भी बना चुके थे।
एशिया नेट न्यूज से बातचीत में तेज गेंदबाज ने कहा, 'बीसीसीआई ने मुझ पर प्रतिबंध लगाया था, आईसीसी ने नहीं। मुझमें अभी काफी क्रिकेट बाकी है। मेरा लक्ष्य अभी सिर्फ क्रिकेट खेलना है।' उन्होंने आगे कहा, 'बीसीसीआई एक स्वायत्त संस्था है, जिसे सभी भारतीय टीम कहते हैं। बीसीसीआई चूंकि एक प्राइवेट फर्म है, ऐसे में किसी अन्य देश से क्रिकेट खेलने में कोई अंतर नहीं हैं। हालांकि, केरल के लिए रणजी ट्रॉफी खेलना अलग है।'
वैसे, श्रीसंत ने जब यह बयान दिया था तो उन्हें बीसीसीआई की तरफ से कड़ा जवाब भी मिला था। बीसीसीआई ने स्पष्ट किया था कि कोई भी खिलाड़ी आईसीसी के किसी पूर्ण सदस्य देश द्वारा क्रिकेट खेलने से प्रतिबंधित किया जाता है तो उसे किसी अन्य पूर्ण सदस्य देश की तरफ से क्रिकेट खेलने का मौका नहीं मिला। उसे किसी सहयोगी देश से भी खेलने की इजाजत नहीं मिलेगी। यह सब कोरी बाते हैं। हम अपनी लीगल पोजिशन से अच्छी तरह वाकिफ हैं।
बहरहाल, श्रीसंत के पास दोबारा क्रिकेट के मैदान पर वापसी करने का शानदार मौका है। अब उनके पास टीम इंडिया में भी वापसी करने का मौका भी है। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने श्रीसंत को आंशिक राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई की कमेटी को तीन माह के भीतर श्रीसंत पर कार्रवाई को लेकर दोबारा विचार करने का आदेश भी दिया है।
श्रीसंत के पक्ष में वह दलील गई, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब निचली अदालत और हाईकोर्ट से राहत मिल गई तो मुझसे आजीवन प्रतिबंध क्यों नहीं हटाया जा रहा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने श्रीसंत के पक्ष में फैसला सुनाते हुए आजीवन प्रतिबंध तो हटा दिया, लेकिन बीसीसीआई की संस्थानात्मक कार्रवाई को ध्यान में रखते हुए तीन महीने में अपने फैसले को लेकर विचार करने को भी कहा है।