तीन महीने बाद अपना 36वां जन्मदिन मनाने जा रहे क्रिकेटर पार्थिव पटेल ने बुधवार को खेल के तमाम प्रारूपों को अलविदा कह दिया। भारत के लिए 17 वर्ष 153 दिन की उम्र में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू करने वाले पार्थिव ने सौरव गांगुली की कप्तानी में पहला टेस्ट खेला था। पार्थिव को 2002 में इंग्लैंड दौरे पर तब भेजा गया, जब उन्होंने रणजी ट्राफी क्रिकेट में भी पदार्पण नहीं किया था।
Parthiv Patel: धोनी ने खत्म किया करियर, 18 साल में यदा-कदा ही टीम में रहे पार्थिव पटेल
पार्थिव ने 'दादा' यानी बीसीसीआई अध्यक्ष गांगुली समेत सारे कप्तानों को धन्यवाद दिया। 2004 में भारतीय टीम से बाहर किए जाने के बाद उन्होंने पहला रणजी मैच खेला। धोनी के आने के बाद पार्थिव विकेटकीपर के तौर पर दूसरी पसंद हो गए और यदा-कदा बतौर बल्लेबाज ही खेले। बाद में सीमित ओवरों में सलामी बल्लेबाज के रूप में कुछ मैच खेले।
पार्थिव ने लेकिन हमेशा स्वीकार किया कि वह धोनी को दोष नहीं दे सकते क्योंकि उन्हें और दिनेश कार्तिक को धोनी से पहले टीम में अपनी जगह पक्की करने के मौके मिले थे। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 2018 में अपना आखिरी टेस्ट मैच खेलने वाले पार्थिव पटेल कभी टीम में अपनी जगह पक्की नहीं कर पाए। जबकि पिछली बार वह वन-डे प्रारूप में 2012 में खेले थे।
हाल ही में एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा था कि, 'मैं अपने को धोनी युग में खेलने के कारण अनलकी नहीं समझता। मेरे पास उनसे पहले प्रदर्शन करने का मौका था। धोनी इसलिए टीम में आए क्योंकि मैंने कुछ सीरीज अच्छी नहीं खेली और मुझे टीम से हटा दिया गया। धोनी ने अवसरों को भुनाया, जिसमें मैं असफल रहा।
टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण करने वाले पार्थिव ने 65 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले, जिनमें 25 टेस्ट, 38 वनडे और दो टी-20 मैच शामिल है, उन्होंने 1696 रन बनाए जिसमें टेस्ट क्रिकेट में 934 रन शामिल हैं। वन-डे क्रिकेट में उन्होंने चार अर्धशतक समेत 736 रन बनाए, इसके अलावा बतौर विकेटकीपर टेस्ट में 62 कैच लपके और 10 स्टम्पिंग की।