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नया साल-नई उम्मीदें, टोक्यो ओलंपिक से लेकर क्रिकेट विश्व कप तक चुनौतियां की भरमार

Wed, 01 Jan 2020 08:31 AM IST
Rohit Ojha स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Published by: Rohit Ojha Updated Wed, 01 Jan 2020 08:31 AM IST
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New year 2020 new hopes and challenges from Tokyo Olympics to Cricket World Cup
Sports - फोटो : सोशल मीडिया
नए साल 2020 का सूरज भारतीय खेल जगत के लिए नई उम्मीदें और चुनौतियां लेकर आया है। पिछले साल विराट की अगुआई में भारतीय क्रिकेट टीम का जलवा रहा। एमसी मैरीकॉम, पीवी सिंधु और पंकज आडवाणी जैसे विश्व चैंपियनों ने अपनी चमक कायम रखी तो निशानेबाज मनु भाकर, सौरभ चौधरी, मुक्केबाज अमित पंघाल और पहलवान दीपक पुनिया जैसे युवा खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से नई आस जगाई है। इस साल टोक्यो में खेलों का महाकुंभ ओलंपिक होना है जहां भारतीय दल रियो ओलंपिक के प्रदर्शन को पीछे छोड़ना चाहेगा।


वहीं इस साल क्रिकेट की दीवानगी भी सिर चढ़कर बोलने जा रही है, क्योंकि अक्तूबर-नवंबर का महीना ऑस्ट्रेलिया में टी-20 विश्व कप के नाम रहेगा। साल की शुरुआत में ही अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप हो रहा है। नवंबर माह में ही लड़कियों का अंडर-17 फीफा विश्व कप देश में खेला जाएगा। कुश्ती की एशियाई चैंपियनशिप, शूटिंग का विश्व कप भी इस साल देश में आयोजित होने जा रहा है। इन चुनौतियों के लिए कौन कितना तैयार है, आइए लेते हैं जायजा...
New year 2020 new hopes and challenges from Tokyo Olympics to Cricket World Cup
टीम इंडिया - फोटो : सोशल मीडिया

क्रिकेट, कर लो विश्व कप मुट्ठी में

टीम इंडिया 2019 में वन डे विश्व कप जीतने की सबसे प्रबल दावेदार थी, लेकिन न्यूजीलैंड ने उसे सेमीफाइनल में मात देकर उसका यह सपना पूरा नहीं होने दिया। 18 अक्तूबर से 15 नवंबर तक ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी-20 विश्व कप के लिए भी भारत को प्रबल दावेदार माना जा रहा है। विश्व कप के लिए अभी से तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और टीम संयोजन के लिए प्रयोगों का दौर चल पड़ा है। 2007 में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में पहला टी-20 विश्व कप जीतने के बाद टीम इंडिया को आज तक क्रिकेट के इस संस्करण में विश्व विजेता बनने का मौका नहीं मिला है।

टीम इंडिया के समक्ष इस विश्व कप को जीतने की बड़ी चुनौती होगी। इससे पहले 17 जनवरी से दक्षिण अफ्रीका में होने वाले अंडर-19 विश्व कप में प्रियम गर्ग की टीम पृथ्वी शॉ की सफलता को दोहराने की कोशिश करेगी। वहीं सीनियर टीम इस साल देश में कोई भी टेस्ट मैच नहीं खेलने जा रही है। जनवरी माह में उसे न्यूजीलैंड का दौरा करना है तो साल के अंत में ऑस्ट्रेलिया से खेलना है। सितंबर में एशिया कप भी है। इसे पाकिस्तान को यूएई में आयोजित करना है।

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मनु भाकर और सौरभ चौधरी - फोटो : Social media

शूटिंग, रियो की विफलता टोक्यो में धोने की बारी

व्यक्तिगत खेलों की बात करें तो शूटिंग ओलंपिक में देश का सबसे सफल खेल है (एक स्वर्ण, दो रजत, एक कांस्य), लेकिन 2016 के रियो ओलंपिक में निशानेबाजों की विफलता ने सभी का दिल तोड़ा था। इस बार टोक्यो ओलंपिक के लिए रिकॉर्ड 15 ओलंपिक कोटे भारतीय शूटरों ने हासिल किए हैं। सौरभ चौधरी, मनु भाकर, अपूर्वी चंदेला जैसे शूटरों ने विश्व कीर्तिमानों को ध्वस्त किया है। पिछली बार की तरह इस बार भी शूटरों से ओलंपिक में पदकों की उम्मीद की जा रही है।

इस बार मिक्स इवेंट (10 मीटर एयर राइफल और 10 मीटर एयर पिस्टल) के शामिल होने से ओलंपिक पदक की उम्मीदें और अधिक परवान चढ़ी हैं। फिलहाल तो एनआरएआई की चयन नीति के तहत निशानेबाजोें के बीच ट्रायल के जरिए ओलंपिक टीम में जगह बनाने की होड़ शुरू होगी। जाहिर है यहां विवाद भी सामने आएंगे। इस बीच फरवरी माह में कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में विश्व कप भी आयोजित किया जाएगा।

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बजरंग पूनिया - फोटो : सोशल मीडिया

कुश्ती में भी हैं पदक के दावेदार

रियो ओलंपिक में देश के हिस्से में आए दो पदकों में से एक कांस्य पदक साक्षी मलिक के नाम रहा था। बीजिंग और लंदन ओलंपिक में भी सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त ने इस खेल में देश को पदक दिलाए। पिछले तीन ओलंपिक से यह खेल देश को पदक दिला रहा है। इस बार भी बजरंग, विनेश फोगाट, दीपक पुनिया, रवि कुमार जैसे पहलवान ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर चुके हैं।

इस साल दो अन्य ओलंपिक क्वालीफायर खेले जाने हैं जहां दूसरे भारतीय पहलवानों के क्वालिफाई करने की उम्मीद है। खासतौर पर पूजा ढांडा, साक्षी मलिक, दिव्या काकरान के अलावा दो बार के ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार क्वालिफाई करने की रेस में हैं। ओलंपिक क्वालिफाइंग टूर्नामेंट से पहले फरवरी माह में दिल्ली में एशियाई चैंपियनशिप का आयोजन किया जा रहा है। हालांकि यह टूर्नामेंट ओलंपिक क्वालिफाइंग नहीं है।

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पीवी सिंधु - फोटो : सोशल मीडिया

सिंधु से स्वर्णिम प्रदर्शन की उम्मीद

रियो ओलंपिक में पीवी सिंधु ने रजत पदक जीतकर देश की लाज रखी थी। 2019 में वह पहली बार विश्व चैंपियन बनीं। सही मायनों में वह बैडमिंटन में देश की पहली विश्व चैंपियन हैं। हालांकि इसके बाद उनके प्रदर्शन में गिरावट आई है, लेकिन माना जाता है कि मुख्य टूर्नामेंट से पहले सिंधू अचानक अपने खेल में जबरदस्त परिवर्तन लाती हैं। यही कारण है कि इस साल उनसे ओलंपिक में भी गोल्ड मेडल की उम्मीद की जा रही है। हालांकि कोरियाई कोच किम जी ह्यून के जाने के बाद उनके प्रदर्शन में फर्क पड़ा है, लेकिन कोच गोपीचंद इसकी काट निकालने में लग गए हैं। वहीं चोट के चलते साइना नेहवाल की न सिर्फ रैंकिंग में गिरावट आई है बल्कि उनका प्रदर्शन भी गिरा है। साइना के अलावा श्रीकांत, साई प्रणीत, एचएस प्रणय, समीर वर्मा और डबल्स में चिराग शेट्टी-सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी ओलंपिक क्वालीफाई करने की होड़ में हैं।

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