हमारे देश में क्रिकेट का कोई धर्म नहीं है, बल्कि क्रिकेट ही धर्म है। बात जब क्रिकेट के खेल से देशभक्ति तक पहुंचती है, तो भारतीय फैंस के जोश के आगे कोई नहीं टिकता। चाहे क्रिकेटर्स को भगवान का दर्जा देने की बात हो या फिर सेना के समर्थन की, देशवासी हर मोर्चे पर जुनून के साथ खड़े रहते हैं।
'जब पाकिस्तानी टीम मैदान पर नमाज पढ़ सकती है, तो धोनी बलिदान बैज क्यों नहीं लगा सकते'
गुरुवार से एक ऐसा विवाद सामने आया है, जो क्रिकेट और सेना के सम्मान जुड़ गया है, जिसके बाद से क्रिकेट फैंस के सिर पर विश्व कप के साथ-साथ देशभक्ति का भी जुनून देखने को मिल रहा है। धोनी के 'बलिदान बैज' लगाकर खेलने से नया विवाद पैदा हो गया है।
इस विवाद पर पाकिस्तान के ही तारिक फतेह ने आपत्ति जताई है। फतेह ने कहा कि जब पाकिस्तानी टीम खेल के मैदान पर नमाज पढ़ती है तो आईसीसी को कोई दिक्कत नहीं होती, लेकिन जब कोई खिलाड़ी अपने ग्लव्स पर एक निशान लगा लेता है, तो उनको इससे क्यों समस्या हो रही है।
The @ICC has no problem with the entire Pakistan cricket team marking territory by praying on the cricket field, denigrating Christians and Jews (part of Muslim ritual prayer) but find insignia on @MSDhoni's gloves inappropriate. pic.twitter.com/8wwZYtnti2
दरअसल, आईसीसी ने महेंद्र सिंह धोनी के ग्लव्स पर पैरा मिलिट्री फोर्स के बलिदान बैज के निशान को हटाने का फरमान जारी किया है। जिसके बाद से लोगों का कहना है कि जब मैच से पहले खिलाड़ी मैदान पर नमाज पढ़ सकते हैं, तो फिर धोनी का ग्लव्स पर सेना के बैज की निशानी लगाकर खेलने में क्या ही गलत है। फैंस आईसीसी के आदेश को मानने को तैयार नहीं हैं और इसे अब सेना के सम्मान से जोड़ दिया है।
महेंद्र सिंह धोनी पैरा मिलिट्री में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल हैं, ऐसे में धोनी आधिकारिक तौर पर बलिदान बैज का इस्तेमाल कर सकते हैं, इसलिए धोनी ने सेना के प्रति सम्मान दिखाते हुए दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच में अपने विकेटकीपिंग ग्लव्स पर बलिदान मेडल का निशान लगाया था। जब फैंस को इस बात का पता चला तो हर कोई धोनी का गुणगान करने लगा है।