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स्वतंत्र भारत के पहले कप्तान की कहानी: लाला अमरनाथ की अगुआई में जीती थी पहली टेस्ट सीरीज, दर्ज हैं कई रिकॉर्ड
Fri, 11 Sep 2026 07:36 AM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Fri, 11 Sep 2026 07:36 AM IST
सार
भारतीय टीम के पूर्व कप्तान लाला अमरनाथ का आज जन्मदिन है। लाला अमरनाथ भारतीय क्रिकेट का वो चेहरा हैं जिनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने अपनी पहली टेस्ट सीरीज जीती थी। आइए उनके रिकॉर्ड पर एक नजर डालें...
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लाला अमरनाथ का जन्मदिन
- फोटो : IANS
विस्तार
भारतीय क्रिकेट टीम मौजूदा समय की सबसे मजबूत और लोकप्रिय टीम है। टीम को ऐसी स्थिति में पहुंचने के लिए एक लंबे और संघर्षपूर्ण दौर से गुजरना पड़ा है और इसमें कई क्रिकेटरों का अहम योगदान रहा है। भारतीय क्रिकेट को मजबूती देने में जिन क्रिकेटरों का अहम योगदान रहा है, उनमें लाला अमरनाथ का नाम महत्वपूर्ण है। लाला अमरनाथ ने एक कप्तान और बल्लेबाज के तौर पर भारतीय क्रिकेट की बेहतरी में अपना अमूल्य योगदान दिया।
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22 साल की उम्र में किया था डेब्यू
लाला अमरनाथ का जन्म 11 सितंबर 1911 को कपूरथला, पंजाब में हुआ था। क्रिकेट खेलने का शौक उन्हें बचपन से था। बल्लेबाजी हो, गेंदबाजी हो या फिर विकेटकीपिंग, तीनों ही विभाग में लाला अमरनाथ दक्ष थे। इसी वजह से उन्हें एक पूर्ण क्रिकेटर माना जाता है। अमरनाथ ने महज 22 साल की उम्र में 1933 में इंग्लैंड के खिलाफ अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का आगाज किया था। उनका अंतरराष्ट्रीय करियर 19 साल लंबा रहा। वह 1952 तक भारतीय टीम का हिस्सा रहे। अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान उन्होंने 24 टेस्ट मैचों की 40 पारियों में एक शतक और चार अर्धशतक लगाते हुए 878 रन बनाए। सर्वाधिक स्कोर 118 था। उन्होंने 45 विकेट भी लिए थे। एक पारी में पांच विकेट लेने की उपलब्धि उन्होंने दो बार हासिल की थी।
लाला अमरनाथ का जन्म 11 सितंबर 1911 को कपूरथला, पंजाब में हुआ था। क्रिकेट खेलने का शौक उन्हें बचपन से था। बल्लेबाजी हो, गेंदबाजी हो या फिर विकेटकीपिंग, तीनों ही विभाग में लाला अमरनाथ दक्ष थे। इसी वजह से उन्हें एक पूर्ण क्रिकेटर माना जाता है। अमरनाथ ने महज 22 साल की उम्र में 1933 में इंग्लैंड के खिलाफ अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का आगाज किया था। उनका अंतरराष्ट्रीय करियर 19 साल लंबा रहा। वह 1952 तक भारतीय टीम का हिस्सा रहे। अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान उन्होंने 24 टेस्ट मैचों की 40 पारियों में एक शतक और चार अर्धशतक लगाते हुए 878 रन बनाए। सर्वाधिक स्कोर 118 था। उन्होंने 45 विकेट भी लिए थे। एक पारी में पांच विकेट लेने की उपलब्धि उन्होंने दो बार हासिल की थी।
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1952 में क्रिकेट को कहा अलविदा
भारतीय क्रिकेट इतिहास के कई स्वर्णिम कीर्तिमान लाला अमरनाथ के नाम दर्ज हैं। वह स्वतंत्र भारत में भारतीय क्रिकेट टीम के पहले कप्तान थे। लाला अमरनाथ की कप्तानी में ही भारतीय टीम ने अपनी पहली टेस्ट सीरीज जीती थी। 1952 में पांच टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए भारत दौरे पर आई पाकिस्तान टीम को 2-1 से हार का सामना करना पड़ा था। इस सीरीज में लाला अमरनाथ ही भारत के कप्तान थे। इस सीरीज के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया था।
भारतीय क्रिकेट इतिहास के कई स्वर्णिम कीर्तिमान लाला अमरनाथ के नाम दर्ज हैं। वह स्वतंत्र भारत में भारतीय क्रिकेट टीम के पहले कप्तान थे। लाला अमरनाथ की कप्तानी में ही भारतीय टीम ने अपनी पहली टेस्ट सीरीज जीती थी। 1952 में पांच टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए भारत दौरे पर आई पाकिस्तान टीम को 2-1 से हार का सामना करना पड़ा था। इस सीरीज में लाला अमरनाथ ही भारत के कप्तान थे। इस सीरीज के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया था।
खिलाड़ी के बाद बतौर मैनेजर भी टीम इंडिया से जुड़े
अमरनाथ ने अपना टेस्ट शतक इंग्लैंड के खिलाफ 17 दिसंबर, 1933 को शतक लगाया था। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत की तरफ से लगाया गया यह पहला शतक है। संन्यास के बाद वह बतौर मैनेजर भी टीम इंडिया के साथ जुड़े थे। 1954-55 में जब भारतीय टीम पाकिस्तान गई थी, तो लाला अमरनाथ ही टीम इंडिया के मैनेजर थे। भारतीय क्रिकेट में लाला अमरनाथ का प्रभाव ऐसा था कि युवा खिलाड़ियों ने उस समय के सर्वाधिक लोकप्रिय खेल हॉकी को छोड़ कर क्रिकेट में दिलचस्पी लेनी शुरू की थी। लाला के बेटे सुरिंद्र अमरनाथ और मोहिंदर अमरनाथ भी भारतीय टीम के लिए खेले। उनके एक अन्य बेटे राजिंदर अमरनाथ भी प्रथम श्रेणी खेले। लाला अमरनाथ का निधन 88 साल की आयु में पांच अगस्त 2000 को नई दिल्ली में हो गया था। भारत सरकार ने उन्हें 1991 में पद्मभूषण से सम्मानित किया था।
अमरनाथ ने अपना टेस्ट शतक इंग्लैंड के खिलाफ 17 दिसंबर, 1933 को शतक लगाया था। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत की तरफ से लगाया गया यह पहला शतक है। संन्यास के बाद वह बतौर मैनेजर भी टीम इंडिया के साथ जुड़े थे। 1954-55 में जब भारतीय टीम पाकिस्तान गई थी, तो लाला अमरनाथ ही टीम इंडिया के मैनेजर थे। भारतीय क्रिकेट में लाला अमरनाथ का प्रभाव ऐसा था कि युवा खिलाड़ियों ने उस समय के सर्वाधिक लोकप्रिय खेल हॉकी को छोड़ कर क्रिकेट में दिलचस्पी लेनी शुरू की थी। लाला के बेटे सुरिंद्र अमरनाथ और मोहिंदर अमरनाथ भी भारतीय टीम के लिए खेले। उनके एक अन्य बेटे राजिंदर अमरनाथ भी प्रथम श्रेणी खेले। लाला अमरनाथ का निधन 88 साल की आयु में पांच अगस्त 2000 को नई दिल्ली में हो गया था। भारत सरकार ने उन्हें 1991 में पद्मभूषण से सम्मानित किया था।