इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की शिखर स्तरीय लोकप्रियता का अंदाजा इसकी ब्रांड वैल्यू से लगाया जा सकता है। साल 2009 से शुरू हुए आईपीएल की पिछले 11 सालों में ब्रांड वैल्यू बुलेट ट्रेन की रफ्तार से बढ़ी है। बड़े से बड़ा विवाद ही आईपीएल की ब्रांड वेल्यू का ठेस पहुंचाने में नाकामयाब रहा है।
ग्लोबल वैल्यूएशन और कॉरपोरेट फाइनेंस एडवाइजर्स डफ एंड फेल्प्स की रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा समय में आईपीएल की ब्रांड वैल्यू 19 पर्सेंट बढ़कर 6.3 अरब डॉलर हो गई है, जो कि पिछले साल 5.3 अरब डॉलर थी। साल 2016 में यह 4.16 अरब डॉलर थी।
डफ एंड फेल्प्स के मैनेजिंग डायरेक्टर संतोष एन ने बताया, 'आईपीएल इकोसिस्टम की वैल्यू में 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। आईपीएल के मुनाफे के लिहाज से यह अब तक की सबसे ऊंची छलांग है।' उन्होंने कहा, 'बीसीसीआई की दो अहम डील की वजह से आईपीएल की ब्रांड वैल्यू में बड़ा इजाफा हुआ है। इसमें वीवो की स्पॉन्सरशिप और स्टार इंडिया के साथ मीडिया राइट्स डील ने भी मुनाफे की सीढ़ियां बनने का काम किया है।'
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रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर
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उन्होंने बताया, 'आईपीएल ने शुरुआत से ही भारतीयों के पसंदीदा प्राइम टाइम स्लॉट पर कब्जा जमा लिया था। इसके बाद आईपीएल को लगातार विज्ञापनों, ब्रॉडकास्टर्स, स्पॉन्सर्स, पार्टनर्स और दर्शकों का सहयोग मिलता गया। धीरे-धीरे आईपीएल इतना लोकप्रिय हो गया कि विज्ञापन देने वाली कंपनियां इससे आकर्षित होने लगीं।'
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मुंबई इंडियंस
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इस साल की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि आईपीएल की दो फैंचाइजी 100 मिलियन डॉलर क्लब में शामिल हो गई हैं, जबकि दो अन्य इससे कुछ ही कदम दूर हैं। मुंबई इंडियंस की ब्रांड वैल्यू 113 मिलियन डॉलर, जबकि कोलकाता नाइट राइडर्स की ब्रांड वैल्यू 104 मिलियन डॉलर मानी गई है। इसके अलावा चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (आरसीबी) दोनों की ब्रैंड वैल्यू 98.0 मिलियन डॉलर है।