क्रिकेट का जुनून देवदत्त पडीक्कल के परिवार को हैदराबाद से बंगलूरू खीच लाया। यह कोई छोटा फैैसला नहीं था। बंगलूरू आने के लिए देवदत्त के पिता को अपना जमा-जमाया व्यापार हैदराबाद से हटाना था। उन्होंने बेटे को बंगलूरू में क्रिकेट सिखाने के लिए यह जोखिम भी उठा लिया। बंगलूरू में बात जब एडमीशन की आई तो कन्नड़ आड़े आ गई जो देवदत्त को आती नहीं थी, लेकिन अपनी बल्लेबाजी के दम पर इस खब्बू बल्लेबाज ने राहुल द्रविड, रोबिन उथप्पा जैसेे क्रिकेटरों को निकालने वाले सेंट जोसेफ ब्वाएज स्कूल के प्रिंसिपल को कन्नड़ के बदले हिंदी देकर एडमीशन देने पर मजबूर कर दिया।
आईपीएल डेब्यू में अर्धशतक लगाने वाले देवदत्त के लिए द्रविड के स्कूल ने तोड़ी कन्नड़ की अनिवार्यता
क्रिकेट और पढ़ाई सब में अव्वल है देवदत्त
देवदत्त की अकादमी कर्नाटक इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिकेट के कोच इरफान सेत अमर उजाला से खुलासा करते हैं कि 11 साल की उम्र में वह उनके पास अकादमी में आया था। उसका एडमीशन उस वक्त चुनौती बन गई थी। सीबीएसई को छोड़ हर स्कूल में कन्नड़ की अनिवार्यता थी और उसे कन्नड़ आती नहीं थी। फिल्म अभिनेत्री अनुष्का शर्मा का भाई करुणेश शर्मा उनकी अकादमी में खेलता था। वह अच्छा क्रिकेटर था और सीबीएसई के आर्मी पब्लिक स्कूल में था। उसी के दम पर उन्होंने देवदत्त का इस स्कूल में दाखिला करा दिया, लेकिन यह स्कूल क्रिकेट के लिए बड़ा नहीं था।
अकेले दम पर सेंट जोसेफ स्कूल को हराया
एक दिन आर्मी स्कूल और सेंट जोसेफ स्कूल का मैच था, जिसमें देवदत्त ने अकेले दम पर सेंट जोसेफ स्कूल को हरा दिया। सेंट जोसेफ को हराना बड़ी बात थी। यह नामी क्रिकेटरों का स्कूल था। फिर क्या था उस मैच के बाद सेंट जोसेफ स्कूल के प्रिंसिपल अपने यहां देवदत्त के एडमीशन के पीछे पड़ गए। उनसे कहा गया कि देवदत्त को कन्नड़ नहीं आती है। प्रिंसिपल ने कहा कोई बात नहीं, इसे हिंदी विषय दिया जाएगा। तब से देवदत्त ने न सिर्फ क्रिकेट में बल्कि वहां पढ़ाई में भी झंडे गाड़े। हाईस्कूल में इस क्रिकेटर ने महज एक माह की पढ़ाई में 95.3 और 12वीं 90 प्रतिशत से ऊपर अंक हासिल किए। अभी वह कॉमर्स से सेंकेड ईयर कर रहा है।
गौतम गंभीर केे हैं प्रशंसक, विराट बने मेंटर
देवदत्त की पारी देखने के बाद इरफान बताते हैं कि कोरोना की वजह से जितनी निराशा और दबाव थे, वह एक झटके में दूर हो गया। इरफान के मुताबिक देवदत्त बचपन से गौतम गंभीर के बड़े प्रशंसक रहे हैं। अब वह विराट कोहली के संरक्षण में हैं। इसका बड़ा प्रभाव पड़ा है। कोच खुलासा करते हैं कि उनके पास गियर बदलने की काबलियत है। लंबे संस्करण में वह उसी अनुसार बल्लेबाजी करते हैं और वन-डे, टी-20 में उसके अनुरुप अपने को ढाल लेते हैं। यही काबिलियत उन्हें विशेष बनाती है।
पूरा परिवार है क्रिकेट का दीवाना
सिर्फ देवदत्त ही नहीं बल्कि उनका पूरा परिवार क्रिकेट का दीवाना है। उन्हें बचपन से ही क्रिकेट का माहौल मिला है। उनके परिवार को विश्वास है कि वह एक दिन भारत के लिए जरूर खेलेगा। इरफान यह भी कहते हैं कि यही समय है जब उसे सफलता नशा अपने सिर पर नहीं चढ़ने देना है। हालांकि वह अपने लक्ष्य के प्रति बेहद केंद्रित है।