इशांत ने अपने पहले 79 टेस्ट मैचों में 226 विकेट लिए, लेकिन पिछले 20 मैचों में उन्होंने 76 विकेट हासिल किए हैं, जिससे लगता है कि दिल्ली के इस तेज गेंदबाज ने टीम की जरूरतों के अनुसार खुद को ढाला है। अब अहमदाबाद में होने वाला तीसरा डे-नाइट मुकाबला उनका 100वां टेस्ट मैच होगा। इशांत इस बीच चोट के कारण पांच मैचों में नहीं खेल पाए, लेकिन अब वह कपिल देव के बाद देश की तरफ से 100 टेस्ट मैच खेलने वाला दूसरा तेज गेंदबाज बनने की राह पर है।
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इशांत शर्मा
- फोटो : पीटीआई
इशांत शर्मा से 2019 के एक रणजी ट्रॉफी मैच के दौरान जब पत्रकारों ने साक्षात्कार के लिए कहा था तो उन्होंने खुद को ‘बुझा हुआ दिया’ करार देकर कन्नी काट ली थी, लेकिन इसके लगभग 14 महीने बाद भारतीय क्रिकेट का यह प्यारा ‘लंबू’ अपना 100वां टेस्ट मैच खेलने के लिए तैयार है।
इशांत ने फिरोजशाह कोटला में तब कहा था, 'अरे यार मेरा इंटरव्यू करके क्या करोगे? मैं तो बुझा हुआ दिया हूं।' इशांत के दिल्ली के पूर्व साथी और कोच विजय दहिया को लगता है कि वह देश की तरफ से 100 टेस्ट मैच खेलने वाला आखिरी तेज गेंदबाज होगा। दहिया ने कहा, 'इशांत 100 टेस्ट मैच खेलने वाला आखिरी भारतीय तेज गेंदबाज होगा। मुझे नहीं लगता कि कोई और 100 टेस्ट मैच खेल पाएगा।'
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इशांत शर्मा
- फोटो : सोशल मीडिया
पिछले 16 वर्षों से इशांत के साथी और दिल्ली के वर्तमान कप्तान प्रदीप सांगवान का मानना है कि जब विराट कोहली और इशांत शर्मा ने दिल्ली के अंडर-17 ट्रायल्स में हिस्सा लिया तो वह अलग तरह का गेंदबाज साफ नजर आता था। सांगवान ने कहा, ‘अंडर-17 के दिनों में भी वह बहुत लंबा था और काफी तेजी से गेंद करता था फिर उसके लहराते बाल, हम उसे चिढ़ाया करते थे। देख ले भाई लंबा शाहरूख आ गया। आपने देखा होगा कि जब विराट की अगुवाई में हमने 2008 में अंडर-19 विश्व कप जीता तब तक इशांत टेस्ट खिलाड़ी बन चुका था और उसे उस टूर्नामेंट में खेलने की जरूरत नहीं थी।’
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प्रदीप सांगवान
- फोटो : social Media
अपनी कड़ी मेहनत और फिटनेस बनाए रखने के कारण वह टेस्ट दर टेस्ट एक स्पैल में आठ से नौ ओवर करते रहे हैं। सांगवान ने कहा, ‘वह 140 किमी की रफ्तार से पिछले 18 वर्षों से हर स्पैल में आठ से नौ ओवर कर रहा है। अब वह 33 का होने जा रहा है और तब भी लगभग इतनी ही गति से इतने लंबे स्पैल कर रहा है।’
दहिया ने कहा, ‘महेंद्र सिंह धोनी ने उसका उपयोग रक्षात्मक गेंदबाज के रूप में किया जो एक छोर से अंकुश लगाए रखता था। यह भूमिका निभाने के लिए वह इशांत पर भरोसा करता था। आप जानते हैं कि वह इतने लंबे समय तक कैसे टीम में बना रहा क्योंकि आपका कप्तान क्या चाहता है यह जानना और उसके अनुसार चलना जरूरी होता है।’