मुंबई में खेले गए तीन मैच की सीरीज के पहले एकदिवसीय में टीम इंडिया को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ करारी हार झेलनी पड़ी है। यह पहला मौका था, जब ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 10 विकेट से रौंदा। 2005 के बाद पहली बार हुआ, जब टीम इंडिया को घरेलू सरजमीं पर 10 विकेट से मात झेलनी पड़ी। जीत के हीरो शतकवीर कंगारू कप्तान आरोन फिंच (110) और डेविड वार्नर (128) रहे। रन चेज में टीम इंडिया के खिलाफ फिंच-वॉर्नर ने सबसे बड़ी साझेदारी भी कर डाली। इन दोनों ने भारतीय गेंदबाजी के खिलाफ जमकर रन बटोरे। आइए जानते हैं कि किन वजहों से टीम इंडिया को इतनी बड़ी हार का सामना करना पड़ा।
हार ने किया टीम इंडिया की कमजोरियों को उजागर, इन पांच वजहों से ऑस्ट्रेलिया से मिली मात
गंवाया टॉस
टीम इंडिया लक्ष्य का पीछा करने में माहिर है। ऐसे में कप्तान विराट कोहली का टॉस हारना भी इस मात की बड़ी वजह बना। भारत में लक्ष्य का पीछा करना हमेशा से आसान रहा है, क्योंकि शाम के समय ओस पड़ती है, जिसकी वजह से गेंदबाजी मुश्किल हो जाती है। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ही ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने फैसला किया। वानखेड़े स्टेडियम की पिच बल्लेबाजों के लिए मददगार रहती है, लेकिन टीम इंडिया के बल्लेबाज बड़ा स्कोर खड़ा करने में असफल रहे।
बल्लेबाज फेल
टॉस गंवाने के बाद टीम इंडिया को कम से कम 300 का स्कोर बनाना चाहिए था, लेकिन उसकी शुरुआत खराब रही और सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा सस्ते में अपना विकेट गंवा बैठे। शिखर धवन और केएल राहुल ने दूसरे विकेट के लिए शतकीय साझेदारी कर पारी को संभालने कि कोशिश की, लेकिन बाकी के बल्लेबाजों ने रन बनाने में कोई भूमिका नहीं निभाई और लागातार विकेट गिरते गए।
अनुभवहीन मिडिल ऑर्डर
धवन और राहुल की शकतीय साझेदारी के बाद टीम को बड़े स्कोर तक ले जाने का जिम्मा मध्यक्रम पर था, लेकिन युवा मिडिल ऑर्डर इसमें पूरी तरह से फेल हो गया। श्रेयस अय्यर (4), ऋषभ पंत (28) जैसे युवा उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। कप्तान विराट कोहली नंबर चार पर बल्लेबाजी के लिए आए, लेकिन वह भी पारी को आगे ले जाने में सफल नहीं हुए।
फिनिशर की कमी
निचले क्रम में भी भारत के पास ऐसा कोई बल्लेबाज नहीं था जो बड़ी पारी खेलकर टीम के स्कोर को बड़े टार्गेट तक ले जा सके। रवींद्र जडेजा (25) और शार्दुल ठाकुर (13) ने कोशिश की, लेकिन वे भी नाकाम रहे। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुंबई वन-डे में केदार जाधव या मनीष पांडे का नहीं होना भारत के लिए भारी पड़ा। क्योंकि दोनों ही बल्लेबाज पारी को संवारने के लिए जाने जाते हैं, साथ ही जाधव पिछले कुछ समय से टीम में फिनिशर की भूमिका में थे।