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हरमन ने हॉकी को बल्ला बनाकर परवान चढ़ाया क्रिकेट का शौक

Sun, 11 Nov 2018 03:53 AM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Updated Sun, 11 Nov 2018 03:53 AM IST
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harmanpreet kaur father want his daughter become a hockey player 
harmanpreet kaur

कप्तान हरमनप्रीत ने 51 गेंद में नाबाद 103 रन की पारी खेली जिससे भारत ने वेस्टइंडीज में चल रहे आईसीसी वर्ल्ड टी-20 के अपने पहले मैच में न्यूजीलैंड के खिलाफ 34 रन की आसान जीत दर्ज की। पंजाब के मोगा जिले की रहने वालीं भारतीय महिला क्रिकेटर की युवा स्टार की गिनती आज विश्व महिला क्रिकेट के धुरंधरों में होती है। 


 

बचपन में पूछा जाता था क्या बनना चाहती हो

harmanpreet kaur father want his daughter become a hockey player 
harmanpreet kaur

बचपन में जब हरमन से पूछा जाता था कि क्या बनना चाहती हो तो वह तपाक से कहती थीं क्रिकेटर जबकि उनको यह नहीं पता था कि यह सपना कैसे पूरा होगा। भाई गुरजिंदर और उनके दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने की शुरुआत हुई। पंजाब शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल कॉलेज में खेलों के लिए विशेष प्रोजेक्ट था लेकिन क्रिकेट उसका हिस्सा नहीं था।

पिता चाहते थे कि बेटी हॉकी खिलाड़ी बने

harmanpreet kaur father want his daughter become a hockey player 
harmanpreet kaur - फोटो : file photo

हरमनप्रीत के पिता चाहते थे कि बेटी हॉकी खिलाड़ी बने लेकिन उन पर तो क्रिकेटर बनने की धुन सवार थी। चुन्नी को कमर पर बांध लेती थीं और हॉकी को बल्ला बनाकर क्रिकेट के शॉट खेलती थी। हरमन भारतीय पुरुष टीम के विस्फोटक बल्लेबाज सहवाग के खेल को पसंद करती थीं। भाई और उनके दोस्त मजाक उड़ाते थे हमारे पास तो स्कोप है पर तू क्या सहवाग के साथ ओपन करेगी। हरमन 2006 में अपने मोगा जिले के दारापुर गांव स्थित ज्ञान ज्योति स्कूल में पड़ने के लिए गई जहां क्रिकेट अकादमी थी। यही से शौक परवान चढ़ गया। 

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छक्के मारने का पुराना है अभ्यास

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हरमनप्रीत कौर

भारतीय महिला टी-20 टीम की कप्तान और वनडे टीम की उपकप्तान बिग बैश लीग में खेलती हैं। वनडे विश्व कप के सेमीफाइनल में 171* रन की पारी खेली थी। वर्ल्ड टी-20 में शुक्रवार को अपने ऐतिहासिक शतक में उन्होंने आठ छक्के मारे जोकि भारत की ओर से रिकॉर्ड है। बड़े शॉट खेलने का अभ्यास हरमन को बचपन से ही है। शुरुआत में कोच अभ्यास के समय लक्ष्य देते थे कि तुम आधी से ज्यादा गेंदों को मैदान में बाउंड्री पर लगे पेड़ के पार पहुंचाना है नहीं तो देर शाम तक ज्यादा अभ्यास करना पड़ेगा और सौ बाउंड्री लगाने पड़ेंगी लेकिन यह आक्रामकबल्लेबाज को याद नहीं कि कभी उन्हें इस कारण ज्यादा देर अभ्यास के लिए रुकना पड़ा। 

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पापा नौकरी के साथ दूध भी बेचते थे 

harmanpreet kaur father want his daughter become a hockey player 
हरमनप्रीत कौर

पचपन साल के हरमंदर सिंह भुल्लर मोगा नौकरी करते हैं लेकिन उससे घर का गुजारा चलना मुश्किल था। हरनम की एक बहन और एक भाई और है। भुल्लर परिवार ने चार भैंस पाल रखी थी और दूध बेचकर घर का खर्च निकाला जाता था। उस समय हरमन को पिता महंगा बल्ला नहीं दिला पाते थे। सस्ते से सस्ता बल्ला दिलाया जाता था। हरमन के स्कूल में क्त्रिस्केट अकादमी से जुड़े कमलधीश सोढ़ी का बड़ा योगदान था। हरमंदर खुद बॉस्केटबॉल और हैंडबॉल के राज्य स्तरीय खिलाड़ी रहे हैं बेटी और बेटे में कभी फर्क नहीं किया। वो चाहते थे हरमन खिलाड़ी बने हालांकि पड़ासी मजाक उड़ाते थे लड़की को खिलाड़ी बनाकर क्या करोगे। मगर हरमंदर ने कभी इसकी परवाह नहीं की।

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