टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने हाल ही में अपनी इच्छा जाहिर करते हुए कहा था कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) विदेशी दौरे पर खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ की पत्नियों को कुछ सप्ताह रुकने के नियम में बदलाव करे। कोहली के इस बयान के बाद अब टीम इंडिया के ओपनर बल्लेबाज गौतम गंभीर ने अपनी आवाज बुलंद की है।
गौतम गंभीर ने कहा यह बात टीम इंडिया के खिलाड़ियों पर निर्भर करती है कि वे अपनी पत्नियों को विदेशी दौरों पर साथ ले जाना चाहते हैं या नहीं। हालांकि इस बीच यह देखना भी जरूरी होगी कि क्या खिलाड़ी मैदान पर अपने प्रदर्शन से खुद को साबित कर पा रहे हैं। अगर वह अच्छी लय में है और बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं तो पत्नियों को दौरे पर साथ ले जाने में कैसा परहेज।
गौरतलब है कि विराट ने कुछ सप्ताह पहले ही बीसीसीआई से इस संबंध में गुजारिश की थी, लेकिन यह फैसला बीसीसीआई पॉलिसी का हिस्सा है। मैनेजर को पहले औपचारिक अनुरोध करना होता है। अनुष्का विदेशी दौरों पर कोहली के साथ रहती हैं। हालांकि, कोहली अब चाहते हैं कि पुराने नियम समाप्त हो और नई नीति आए, जिसमें पत्नियों को भारतीय टीम के साथ यात्रा करने की अनुमति हो।
मौजूदा नियमों के मुताबिक खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ की पत्नियों या घर के सदस्यों को दो सप्ताह तक टीम के साथ रूकने की इजाजत है। इस बारे में लोगों की राय अलग-अलग हैं कि बड़े दौरों पर पत्नियों या बच्चों को टीम के साथ रहना चाहिए या नहीं।
क्रिकेट खेलने वाले कई देशों ने परिवार के समय पर पाबंदी लगा रखी है। यह मामला फुटबॉल विश्व कप के दौरान भी सामने आया जब कुछ देशों ने पत्नियों और गर्लफ्रेंड्स को खिलाड़ियों के साथ रूकने अथवा कुछ ने साथ नहीं रहने का फैसला किया।