200 साल तक अंग्रेजों की गुलामी सहने के बाद आखिरकार 1947 में भारत को आजादी मिली। इस तरह क्रिकेट भी भारतीयों को विरासत में ही मिली। आजादी के पहले से इस देश में क्रिकेट खेली जाती रही है। महाराजा रणजीत सिंह (1895-1902) इंग्लैंड के लिए क्रिकेट खेलते थे। आजादी के बाद अब यह खेल हर हिंदुस्तानी की रगों में लहू बनकर दौड़ता है। धर्म की तरह माना जाता है।
देश का हर युवा क्रिकेट स्टार बनने की चाहत रखता है क्योंकि एक तरफ क्रिकेटरों को भगवान का दर्जा हासिल है तो दूसरी तरफ उनके पास शोहरत के साथ-साथ अथाह दौलत भी है, लेकिन आज से 30-40 साल पहले भारतीय क्रिकेट की तस्वीर ऐसी नहीं थी।
उस दौर के कई क्रिकेट खिलाड़ी आज भी आर्थिक तंगी में जीवन जी रहे हैं, लेकिन भारतीय क्रिकेट की आज की सफलता की जड़े उसी दौर में छिपी हैं। उन्हीं खिलाड़ियों ने 1983 में टीम इंडिया को पहली बार विश्व विजेता बनाकर हमेशा के लिए भारतीय क्रिकेट की तस्वीर बदल दी।