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Independence Day 2019: हॉकी के देश में ऐसे बदली भारतीय क्रिकेट की तस्वीर

Fri, 16 Aug 2019 03:22 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Published by: अंशुल तलमले Updated Fri, 16 Aug 2019 03:22 PM IST
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From 1947 to 2019: Evolution of cricket in India post independence
कपिल देव (लॉर्ड्स) - फोटो : ESPN

200 साल तक अंग्रेजों की गुलामी सहने के बाद आखिरकार 1947 में भारत को आजादी मिली। इस तरह क्रिकेट भी भारतीयों को विरासत में ही मिली। आजादी के पहले से इस देश में क्रिकेट खेली जाती रही है। महाराजा रणजीत सिंह (1895-1902) इंग्लैंड के लिए क्रिकेट खेलते थे। आजादी के बाद अब यह खेल हर हिंदुस्तानी की रगों में लहू बनकर दौड़ता है। धर्म की तरह माना जाता है।

देश का हर युवा क्रिकेट स्टार बनने की चाहत रखता है क्योंकि एक तरफ क्रिकेटरों को भगवान का दर्जा हासिल है तो दूसरी तरफ उनके पास शोहरत के साथ-साथ अथाह दौलत भी है, लेकिन आज से 30-40 साल पहले भारतीय क्रिकेट की तस्वीर ऐसी नहीं थी।

उस दौर के कई क्रिकेट खिलाड़ी आज भी आर्थिक तंगी में जीवन जी रहे हैं, लेकिन भारतीय क्रिकेट की आज की सफलता की जड़े उसी दौर में  छिपी हैं। उन्हीं खिलाड़ियों ने 1983 में टीम इंडिया को पहली बार विश्व विजेता बनाकर हमेशा के लिए भारतीय क्रिकेट की तस्वीर बदल दी।

From 1947 to 2019: Evolution of cricket in India post independence
महाराजा रणजीत सिंह - फोटो : सोशल मीडिया

1947 में देश की आजादी के बाद भी भारतीय क्रिकेट राजवाड़ों के शौक के साथ मंद गति से आगे बढ़ता रहा। लेकिन वनडे क्रिकेट के पदार्पण ने भारतीय क्रिकेट का कायाकल्प कर दिया। विश्वकप जीत ने भारत में हमेशा के लिए क्रिकेट के मायने बदल दिए। 

From 1947 to 2019: Evolution of cricket in India post independence
कपिल देव - फोटो : getty
1972 में वनडे क्रिकेट की शुरुआत होने के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की तस्वीर बदलनी शुरू हुई। 1975 में  पहली बार क्रिकेट विश्वकप का आयोजन हुआ। 1975 और 1979 के विश्वकप में एस वेंकटराघवन की कप्तानी में टीम इंडिया केवल एक जीत हासिल कर सकी थी। वह भी ईस्ट अफ्रीका जैसी टीम के खिलाफ। यहां तक कि 1979 में श्रीलंका ने भी टीम इंडिया को धूल चटा दी थी। ऐसे में जब कपिल की अगुवाई वाली टीम इंडिया 1983 में तीसरी बार विश्वकप में भाग लेने इंग्लैंड पहुंची तो कोई भी उसे फेवरेट नहीं मान रहा था। लेकिन तकदीर को कुछ और ही मंजूर था।
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From 1947 to 2019: Evolution of cricket in India post independence
कपिल देव (वर्ल्ड कप 1983) - फोटो : twitter

भारतीय टीम ने दो बार की विश्व चैंपियन वेस्टइंडीज को मात देकर अपने विश्वकप अभियान की शुरुआत की। पिछले दो विश्वकप में अपराजेय रही कैरेबियाई टीम के लिए भी यह एक बड़ा झटका था। नॉक आउट राउंड में पहुंचने से पहले भारत की परीक्षा जिंबाब्वे के खिलाफ हुई जब टीम इंडिया मे 17 रन पर पांच विकेट गंवा दिए थे। ऐसे में टीम के कप्तान कपिल देव ने नाबाद 175 रन की पारी खेलकर भारतीय टीम को न केवल परेशानी से उबारा बल्कि विकेट कीपर सैयद किरवानी के साथ नवें विकेट के लिए अविजित 126 रन की साझेदारी कर टीम को 8 विकेट पर 266 रन तक पहुंचाया। कपिल ने अपनी इस आतिशी पारी में 16 चौके और 6 छक्के जड़े। जो लंबे समय तक वनडे में सर्वाधिक छक्कों का रिकॉर्ड रहा।

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From 1947 to 2019: Evolution of cricket in India post independence
विश्व कप 1983

जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच भारतीय टीम के आत्मविश्वास को बढ़ाने में सबसे अहम साबित हुआ। अंत में भारत को महज 31 रन से जीत हासिल हुई, लेकिन इस के बाद टीम इंडिया के खिलाड़ियों के अंदर यह आत्मविश्वास जागा कि हम मैच में किसी भी परिस्थिति में वापसी करने में सक्षम हैं। इसके बाद कपिल की सेना कोई मैच नहीं हारी और विश्व फतह कर स्वदेश वापस लौटी।

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