टीम इंडिया के सफलतम कप्तानों में से एक रहे सौरव गांगुली ने आज बीसीसीआई के 39वें अध्यक्ष के रूप में बोर्ड की कमान ली। गांगुली को भारतीय क्रिकेट टीम में बदलाव लाने के लिए जाना जाता है। वह कड़े फैसले लेने में देर नहीं लगाते, हमेशा कुछ नया करने का जुनून उनपर सवार रहा है। सौरव के अध्यक्ष बनने से क्रिकेट से लगाव रखने वाले लोगों में यह उम्मीद जगी है कि, पिछले कुछ साल में जिस तरह से बीसीसीआई ने फजीहत झेली है, जो इल्जाम उसपर लगे हैं दादा सब अपने कमों से साफ कर देंगे। गांगुली का अध्यक्ष के तौर पर कार्यकाल महज 10 महीने का है, ऐसे उन्हें टी-20 के अंदाज में फैसले लेने होंगे। आइए जानते हैं कि अध्यक्ष के तौर पर गांगुली किन चार मुद्दों पर बड़ा फैसला ले सकते हैं।
क्या सौरव गांगुली लगा पाएंगे फैसलों का 'चौका', सामने खड़ी ये चार चुनौतियां
पिंक गेंद
गुलाबी गेंद से टीम इंडिया ने अभी तक कोई भी मुकाबला नहीं खेला है। सौरव गांगुली डे-नाईट टेस्ट के आयोजन पर फैसला कर सकते हैं। खासकर इस समय में जब टेस्ट क्रिकेट का रोमांच खेल प्रेमियों को बीच से खत्म हो रहा है। ऐसे में गांगुली के कार्यकाल में हो सकता है कि टीम इंडिया अपना पहला डे-नाइट टेस्ट मैच खेले।
एसएस धोनी
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के क्रिकेटिंग भविष्य को लेकर अटकलों का बाजार विश्व कप के बाद से ही गर्म है। धोनी ने लगातार दो सीरीज में खुद को टीम से दूर रखा है। ऐसे में बांग्लादेश के खिलाफ अगले महीने खेली जाने वाली टी-20 सीरीज में क्या एमएस वापसी करेंगे यह बड़ा सवाल है। धोनी अगर बांग्लादेश के खिलाफ टीम में वापसी नहीं करते हैं, तो टी-20 विश्व कप के लिहाज से गांगुली जरूर धोनी के भविष्य पर ले सकते हैं।
घरेलू क्रिकेट
सौरव गांगुली का ध्यान सबसे अधिक घरेलू क्रिकेट को बेहतर बनाने पर है। वह खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराना चाहते हैं। इसके अलावा उन्होंने ये भी साफ कर दिया है कि घरेलू खिलाड़ियों को प्रोत्साहन और वित्तीय सुरक्षा देना उनकी बड़ी प्राथमिकता है। गांगुली पिछले कई साल से क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल से जुड़े रहे हैं, जिससे उन्हें इस बात का अंदाजा है कि घरेलू खिलाड़ियों को किस चीज की जरूरत है।
आईसीसी टूर्नामेंट
सौरव गांगुली पहले ही कह चुके हैं कि टीम इंडिया को अब 2020 में होने वाले टी-20 विश्व कप के लिए तैयारी करने पर ध्यान देना चाहिए। टीम के आईसीसी टूर्नामेंट जीतने और आईसीसी से फ्यूचर टूर प्रोग्राम पर बात करने पर भी उनका जोर रहेगा। साथ ही वह इस बात का भी ख्याल रखना होगा कि टीम बैक-टू-बैक सीरीज नहीं खेले, खिलाड़ियों को रेस्ट भी दी जाए।