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छठ पूजा 2017- जानें क्या है पूजा का विधान, भगवान भास्कर ऐसे करेंगे मनोकामना पूरी
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 24 Oct 2017 07:56 AM IST
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इस बार छठ महोत्सव मंगलवार यानी 24 से शुरू होकर 27 अक्तूबर तक मनाया जाएगा। इस दिन व्रत करने वाली महिलाएं स्नान और पूजन-अर्चन के बाद कद्दू व चावल के बने प्रसाद को ग्रहण करती हैं।
पूजा के लिए सजे बाजार
- फोटो : अमर उजाला
कानपुरः इस बार छठ महोत्सव मंगलवार यानी 24 से शुरू होकर 27 अक्तूबर तक मनाया जाएगा। शहर में लाखों की संख्या में भोजपुरी समाज केलोग रहते हैं। जिसके चलते यह पर्व धूमधाम से विजय नगर, अर्मापुर, शास्त्री नगर छोटा सेंट्रल पार्क, बड़ी सेंट्रल पार्क, कमला नगर, रतनपुर, आवास विकास, दबौली पश्चिम, सीटीआई, साकेत नगर आदि इलाकों में मनाया जाता है।
छठ पूजा के लिए सजी कानपुर की पनकी नहर
- फोटो : अमर उजाला
24 अक्तूबर पहला दिन नहाय खाय
नहाय खाय के दिन घर की पूरी तरह से सफाई कर स्वच्छ होकर शुद्ध शाकाहारी भोजन बनाते हैं। इस दिन व्रत करने वाली महिलाएं स्नान और पूजन-अर्चन के बाद कद्दू व चावल के बने प्रसाद को ग्रहण करती हैं।
नहाय खाय के दिन घर की पूरी तरह से सफाई कर स्वच्छ होकर शुद्ध शाकाहारी भोजन बनाते हैं। इस दिन व्रत करने वाली महिलाएं स्नान और पूजन-अर्चन के बाद कद्दू व चावल के बने प्रसाद को ग्रहण करती हैं।
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25 अक्तूबर को खरना
इस दिन से महिलाआें का 36 घंटे का निर्जला उपवास प्रारंभ होता है जो उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पूरा होता है। इस दिन व्रती महिलाएं उपवास कर शाम को स्नानकर विधि विधान से रोटी और गुड़ से बनी खीर का प्रसाद तैयार कर भगवान भास्कर की आराधना करती हैं। इसके बाद प्रसाद ग्रहण करती हैं।
इस दिन से महिलाआें का 36 घंटे का निर्जला उपवास प्रारंभ होता है जो उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पूरा होता है। इस दिन व्रती महिलाएं उपवास कर शाम को स्नानकर विधि विधान से रोटी और गुड़ से बनी खीर का प्रसाद तैयार कर भगवान भास्कर की आराधना करती हैं। इसके बाद प्रसाद ग्रहण करती हैं।
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26 अक्तूबर की शाम को अर्घ्य
तीसरे दिन सूर्य षष्ठी को पूरे दिन उपवास रखकर शाम के समय डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन रात के समय छठी माता के गीत, भजन और व्रत कथा सुनने की मान्यता है।
तीसरे दिन सूर्य षष्ठी को पूरे दिन उपवास रखकर शाम के समय डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन रात के समय छठी माता के गीत, भजन और व्रत कथा सुनने की मान्यता है।