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Sehore News: 'न ट्रैक्टर, न बैल...', 90 साल के किसान ने खुद की खेत की जुताई, कहा- मैं रुक नहीं सकता

Mon, 21 Jul 2025 02:47 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Mon, 21 Jul 2025 02:47 PM IST
सार

मध्यप्रदेश के सीहोर जिले से 90 वर्षीय बुजुर्ग किसान अमर सिंह का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वे खुद साइकिल के पहिए से बने देसी हल से खेत जोतते नजर आ रहे हैं। उनके पास न ट्रैक्टर है, न बैल और न ही किसी तरह की सरकारी मदद।
 

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90 year old farmer ploughs field without tractor or bullocks
खेत जोतने को मजबूर 90 साल का किसान - फोटो : अमर उजाला
कृषि मंत्री के गृह जिले सीहोर से एक बुजुर्ग किसान का मार्मिक वीडियो सामने आया है, जो न केवल प्रशासनिक दावों की हकीकत उजागर करता है, बल्कि प्रदेश में किसानों की बदहाल स्थिति पर भी सवाल उठाता है। यह वीडियो ग्राम तज अमरोद निवासी 90 वर्षीय किसान अमर सिंह का है, जो खुद जुतकर खेत में परंपरागत तरीके से हकाई करते नजर आ रहे हैं। अमर सिंह के पास मात्र तीन एकड़ जमीन है, लेकिन संसाधनों के अभाव में वह न तो ट्रैक्टर का उपयोग कर सकते हैं और न ही बैलों का। ऐसे में उन्होंने देसी जुगाड़ से साइकिल के पहिए से बना हल तैयार किया है, जिससे खुद ही खेत जोतते हैं।


 
90 year old farmer ploughs field without tractor or bullocks
सीहोर में 90 साल का किसान बना संघर्ष की मिसाल - फोटो : अमर उजाला
"मैं रुक नहीं सकता..." 

अत्यधिक थके हुए नजर आ रहे अमर सिंह ने बताया, “मेरी बाहें कांपती हैं, पैरों में ताकत नहीं बची, गर्दन भी जवाब देने लगती है... लेकिन मेरे पास कोई विकल्प नहीं है।” किसान की यह हालत कृषि व्यवस्था की विफलताओं की गवाही देती है। उनका बेटा बीमार है और काम करने में असमर्थ है, पत्नी से बनती नहीं, बहू ही कभी कभी मदद कर देती है। अमर सिंह और उनका परिवार टूटी हुई झोपड़ी में जीवन गुजार रहा है। खेती से बमुश्किल जीवन यापन हो पा रहा है। बुजुर्ग किसान का कहना है कि बीते दस वर्षों से सोयाबीन की खेती लगातार प्राकृतिक आपदाओं और खराब बीजों के कारण खराब होती रही है, लेकिन उन्हें अब तक एक भी रुपया सरकारी मुआवजे या फसल बीमा के रूप में नहीं मिला।
90 year old farmer ploughs field without tractor or bullocks
सीहोर में छलका किसान का दर्द - फोटो : अमर उजाला
"फसल का नुकसान होता है, पर बीमा का लाभ नहीं मिलता"

गांव के समाजसेवी एमएस मेवाड़ा ने भी किसानों की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में क्षेत्र में बाढ़, सूखा और कीटनाशक दवाओं की खराबी से किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं। उन्होंने कहा, “बैंक खाते से फसल बीमा प्रीमियम काट लिया जाता है, लेकिन नुकसान होने पर किसानों को बीमा राशि नहीं मिलती।”

यह पूरा मामला उस जिले से जुड़ा है जो खुद राज्य के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का गृह क्षेत्र है। ऐसे में यह सवाल खड़ा करता है कि जब मंत्री के अपने क्षेत्र में ही किसान इस हाल में हैं तो प्रदेश के अन्य हिस्सों की क्या स्थिति होगी? अमर सिंह का संघर्ष और वीडियो लोगों को सात दशक पहले की ‘मदर इंडिया’ फिल्म की याद दिला रहा है, जिसमें एक महिला किसान गरीबी और संघर्ष से जूझती है। दुर्भाग्यवश, इतने वर्षों बाद भी कई किसानों की जिंदगी में कोई बदलाव नहीं आया है।
 
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