फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

गुरु के बाद शिष्या भी पद्मश्री: गायकी के चलते ऊषा को पिता ने फेंक दिया था कुएं में; तीजनबाई ने सिखाई पंडवानी

Thu, 26 Jan 2023 06:18 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दुर्ग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दुर्ग Published by: मोहनीश श्रीवास्तव Updated Thu, 26 Jan 2023 06:18 PM IST
सार

1998 में विद्याचरण शुक्ल के नेतृव में मध्यप्रदेश शासनकाल में छत्तीसगढ़ प्रदेश बनाने की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर में धरना प्रदर्शन किया जा रहा था। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने ऊषा बारले समेत अन्य लोगो को गिरफ्तार किया था। ऊषा बारले ने इस दौरान 45 मिनट जेल में रहीं।

विज्ञापन
chhattisgarh pandwani singer usha barle will get padma shri award
पंडवानी गायिका ऊषा बारले। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

छत्तीसगढ़ की एक और पंडवानी गायिका ऊषा बारले को पद्मश्री सम्मान मिलेगा। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत सरकार की ओर से इसकी घोषणा की गई है। दुर्ग की रहने वाली ऊषा बारले को बचपन में उनके पिता ने गायन के चलते ही कुएं में फेंक दिया था, लेकिन इसी के दम पर वह सम्मान के शिखर पर पहुंची। खास बात यह है कि ऊषा बारले ने तीजनबाई से ही पंडवानी सीखी है। इससे पहले तीजनबाई को पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण सम्मान दिया जा चुका है। 

chhattisgarh pandwani singer usha barle will get padma shri award
पद्मश्री सम्मान की घोषणा के बाद परिजनों ने उनका मुंह मीठा कराया। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

पंडवानी गायन की शिक्षा के लिए राज्य में खुले स्कूल
पद्मश्री सम्मान के लिए उनके नाम की घोषणा होने के बाद ऊषा बारले और उनका पूरा परिवार बेहद खुश है। ऊषा बारले बताती हैं कि पहले वह पंथी गाना गाती थीं, लेकिन बाद में उनकी रुचि पंडवानी की तरफ हो गई। इसके लिए सबसे पहले उनके फूफा ही उनके गुरू बने। इसके बाद प्रख्यात गायिका तीजनबाई से उन्होंने शिक्षा ग्रहण की। वह कहती हैं कि, राज्य सरकार पंडवानी की शिक्षा के लिए स्कूल खोले। जिसमे पंडवानी के रुचि रखने वाले बच्चो को शिक्षा दे सकें।

chhattisgarh pandwani singer usha barle will get padma shri award
पद्मश्री ऊषा बारले। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

परिजनों ने बाल्टी से बाहर निकाला
ऊषा बारले ने बताया कि बचपन में गाना गाने से गुस्सा में आकर उनके पिता ने भिलाई के शारदा पारा स्थित कुएं में फेंक दिया था। उस समय कुएं में पानी कम था। इसके कारण वे बच गईं। उनके परिजनों ने बाल्टी और रस्सी को मदद से बाहर निकाला। इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और प्रस्तुति देती रहीं। वह बताती हैं कि पंडवानी गायन छत्तीसगढ़ की प्राचीन विद्या हैं। इसे गायन के माध्यम से महाभारत की कथा सुनाई जाती है। वे छत्तीसगढ़ के प्राचीन गहने पहनकर प्रस्तुति देती हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन
chhattisgarh pandwani singer usha barle will get padma shri award
मंच पर प्रस्तुति देती पंडवानी गायिका ऊषा बारले। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

अब तक कई सम्मान मिल चुके
ऊषा बारले ने भारत के विभिन्न राज्यों सहित लंदन और न्यूयॉर्क में भी पंडवानी की प्रस्तुति दी है। पंडवानी के लिए उन्हें छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा गुरु घासीदास सामाजिक चेतना पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इसके साथ ही उन्हें भिलाई स्टील प्लांट प्रबंधन द्वारा दाऊ महासिंह चंद्राकर सम्मान से सम्मानित और गिरोधपुरी तपोभूमि में भी वे छह बार स्वर्ण पदक से सम्मानित की जा चुकी हैं। 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed