छत्तीसगढ़ की एक और पंडवानी गायिका ऊषा बारले को पद्मश्री सम्मान मिलेगा। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत सरकार की ओर से इसकी घोषणा की गई है। दुर्ग की रहने वाली ऊषा बारले को बचपन में उनके पिता ने गायन के चलते ही कुएं में फेंक दिया था, लेकिन इसी के दम पर वह सम्मान के शिखर पर पहुंची। खास बात यह है कि ऊषा बारले ने तीजनबाई से ही पंडवानी सीखी है। इससे पहले तीजनबाई को पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण सम्मान दिया जा चुका है।
गुरु के बाद शिष्या भी पद्मश्री: गायकी के चलते ऊषा को पिता ने फेंक दिया था कुएं में; तीजनबाई ने सिखाई पंडवानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दुर्ग
Published by: मोहनीश श्रीवास्तव
Updated Thu, 26 Jan 2023 06:18 PM IST
सार
1998 में विद्याचरण शुक्ल के नेतृव में मध्यप्रदेश शासनकाल में छत्तीसगढ़ प्रदेश बनाने की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर में धरना प्रदर्शन किया जा रहा था। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने ऊषा बारले समेत अन्य लोगो को गिरफ्तार किया था। ऊषा बारले ने इस दौरान 45 मिनट जेल में रहीं।
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