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CG: जनजातीय संस्कृति पर केंद्रित बस्तर पंडुम को देखकर राष्ट्रपति द्रौपदी हुईं अभिभूत, देखें ये मनमोहक तस्वीरें
Sat, 07 Feb 2026 05:15 PM IST
ललित कुमार सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: ललित कुमार सिंह
Updated Sat, 07 Feb 2026 05:15 PM IST
सार
Draupadi Murmu CG Visit: छत्तीसगढ़ के बस्तर पंडुम में शिरकत करने होने पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज शनिवार को बस्तर की माटी की सुगंध और आदिम जनजातीय परंपराओं पर आधारित भव्य प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
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- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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Draupadi Murmu CG Visit: छत्तीसगढ़ के बस्तर पंडुम में शिरकत करने होने पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज शनिवार को बस्तर की माटी की सुगंध और आदिम जनजातीय परंपराओं पर आधारित भव्य प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
मल्लखंब की अद्भुत प्रस्तुति देखकर राष्ट्रपति हुईं अभिभूत
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
यह पहला अवसर था जब अबूझमाड़ क्षेत्र के बच्चों ने एक साथ राष्ट्रपति के समक्ष मल्लखंब का जीवंत और साहसिक प्रदर्शन किया। लकड़ी के खंभे पर जब इन नन्हे कलाकारों ने असाधारण संतुलन, फुर्ती और कठिन करतबों का प्रदर्शन किया, तो मैदान में मौजूद दर्शक विस्मय से भर उठे। जोश, अनुशासन और उत्कृष्ट तकनीक से सजी इस प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भावविभोर कर दिया। राष्ट्रपति मुर्मू बच्चों की प्रतिभा से अत्यंत प्रभावित हुईं । उन्होंने न केवल उनके साहस, कला और अनुशासन की मुक्तकंठ से प्रशंसा की, बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी प्रदान कीं।
यह पहला अवसर था जब अबूझमाड़ क्षेत्र के बच्चों ने एक साथ राष्ट्रपति के समक्ष मल्लखंब की प्रस्तुति दी।
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यह पहला अवसर था जब अबूझमाड़ क्षेत्र के बच्चों ने एक साथ राष्ट्रपति के समक्ष मल्लखंब का जीवंत और साहसिक प्रदर्शन किया। लकड़ी के खंभे पर जब इन नन्हे कलाकारों ने असाधारण संतुलन, फुर्ती और कठिन करतबों का प्रदर्शन किया, तो मैदान में मौजूद दर्शक विस्मय से भर उठे। जोश, अनुशासन और उत्कृष्ट तकनीक से सजी इस प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भावविभोर कर दिया। राष्ट्रपति मुर्मू स्वयं बच्चों की प्रतिभा से अत्यंत प्रभावित हुईं । उन्होंने न केवल उनके साहस, कला और अनुशासन की मुक्तकंठ से प्रशंसा की, बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी प्रदान कीं।
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विश्व-प्रसिद्ध ‘गौर नृत्य’ ने पूरे परिसर को ढोल की थाप और घुंघरुओं की झनकार से गुंजायमान कर दिया।
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
बास्तानार क्षेत्र के आदिवासी युवाओं द्वारा प्रस्तुत विश्व-प्रसिद्ध ‘गौर नृत्य’ ने पूरे परिसर को ढोल की थाप और घुंघरुओं की झनकार से गुंजायमान कर दिया। राष्ट्रपति ने इस मनोहारी प्रस्तुति का तन्मयता से अवलोकन करते हुए बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को निकट से महसूस किया।
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इस शानदार प्रस्तुति ने सबका मन मोह लिया।
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बास्तानार के युवाओं द्वारा प्रस्तुत यह नृत्य केवल एक सांस्कृतिक प्रदर्शन भर नहीं था, बल्कि ‘दंडामी माड़िया’ (बाइसन हॉर्न माड़िया) जनजाति की परंपराओं, जीवन-दर्शन और सांस्कृतिक चेतना का एक जीवंत दस्तावेज था। जैसे ही नर्तक दल मंच पर उतरा, उनकी विशिष्ट वेशभूषा ने उपस्थित जनसमूह का ध्यान सहज ही अपनी ओर आकर्षित कर लिया। पुरुष नर्तकों के सिर पर सजे गौर के सींगों वाले मुकुट, जिन्हें कौड़ियों और मोरपंखों से अलंकृत किया गया था, बस्तर की वन्य संस्कृति तथा गौर पशु के प्रति आदिवासी समाज के गहरे सम्मान और श्रद्धा को प्रतीकात्मक रूप से अभिव्यक्त कर रहे थे। वहीं पारंपरिक साड़ियों और आभूषणों से सुसज्जित महिला नर्तकियों ने जब अपने हाथों में थमी ‘तिरूडुडी’ (लोहे की छड़ी) को भूमि पर पटकते हुए ताल दी, तो एक अद्भुत, गूंजती और लयबद्ध ध्वनि ने वातावरण को मंत्रमुग्ध कर दिया।