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देखिए एक करोड़पति, जो लंगर लगाकर बना 'कंगाल', पर किसी को भूखा नहीं सोने देता

Wed, 22 Mar 2017 09:57 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 22 Mar 2017 09:57 AM IST
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unqiue story of billionaire jagdish lal ahuja, sold property To Offer Free Meals To The Poor
चंडीगढ़ के जगदीश लाल आहुजा
यह इंसान कैंसर से पीड़ित है और किसी समय करोड़पति था। 17 साल से लंगर लगा-लगाकर आज यह कंगाली के दौर से गुजर रहा है, लेकिन किसी को भूखा नहीं सोने देता।
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चंडीगढ़ के जगदीश लाल आहुजा
इनका नाम है 82 वर्षीय जगदीश लाल आहुजा। इन्हें लोग बाबा और इनकी पत्नी को जय माता दी के नाम से जानते हैं। 80 साल का ये बुजुर्ग पत्नी के साथ मिलकर रोज एक हजार लोगों का पेट भरता है। 17 साल से ये इंसान पीजीआई के बाहर दाल, रोटी, चावल और हलवा बांट रहा है, वो भी बिना किसी छुट्टी के। जो लोग उन्हें जानते हैं, वह कहते हैं कि आहुजा ने एक से डेढ़ हजार लोगों को गोद ले रखा है।

 
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चंडीगढ़ के जगदीश लाल आहुजा
ऐसा माना जाता है कि जब तक आहुजा जिंदा हैं, तब तक पीजीआई का कोई मरीज रात में भूखा नहीं सो सकता। वर्ष 2001 से लगातार वे पीजीआई के बाहर लंगर लगा रहे हैं। हर रात 500 से 600 व्यक्तियों का लंगर तैयार होता है। लंगर के दौरान आने वाले बच्चों को बिस्कुट और खिलौने भी बांटे जाते हैं। मजबूरों का पेट भरने के लिए वे अपनी कई प्रॉपर्टी भी बेच चुके हैं।
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चंडीगढ़ के जगदीश लाल आहुजा
आहुजा बताते हैं कि साल 2001 में जब वे बीमार हुए थे तो उस दौरान पीजीआई में एडमिट थे। बड़ी मुश्किल से जीवन बचा था। उसके बाद से पीजीआई में लंगर लगा रहे हैं। पहले वे दो हजार से ज्यादा लोगों के लिए खाना लाते थे। उनकी देखा-देखी कई लोग पीजीआई के बाहर लंगर लगाने लगे। इससे उनके यहां आने वाले लोगों की संख्या कम हो गई है।

 
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चंडीगढ़ के जगदीश लाल आहुजा
आहुजा कहते हैं कि सर्दी हो या गर्मी लेकिन कभी भी उनका लंगर बंद नहीं हुआ। आहुजा की उम्र 82 साल हो चुकी है। पेट के कैंसर से पीड़ित हैं। ज्यादा दूर चल नहीं पाते। इसके बावजूद लोगों की मदद करने में उनके जज्बे का कोई मुकाबला नहीं है। मरीजों और जरूरतमंदों के बीच में वे बाबा जी के नाम जाने जाते हैं। कई जरूरतमंद मरीजों को वे आर्थिक मदद भी मुहैया कराते हैं।
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