देश में एक ऐसा तीर्थ है, जहां हिन्दू, मुस्लिम और सिख एक साथ शीश नवाते हैं और पवित्र सरोवर में स्नान कर मोक्ष की कामना करते हैं। देखिए तस्वीरों में।
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हरियाणा के यमुनानगर में कपालमोचन तीर्थ
- फोटो : अमर उजाला
ये तीर्थ स्थान है, हरियाणा के यमुनानगर में स्थित कपालमोचन तीर्थ स्थल। यहां हर साल विशाल मेला लगता है। गत दिवस से इस साल का मेला शुरू हो गया। पहले ही दिन काफी संख्या में लोग दर्शनार्थ पहुंचे।
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हरियाणा के यमुनानगर में कपालमोचन तीर्थ
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कपालमोचन तीर्थ स्थल का अपना ही महत्व है। इसीलिए वेदों में वर्णित भी है कि सारे तीर्थ बार-बार कपालमोचन एक बार। यहां द्वापर, त्रेता कलयुग का इतिहास सिमटा है। शास्त्रों के अनुसार यहां श्रीराम, श्रीकृष्ण, पांडव कौरव भी पितरों की शांति के लिए आए। कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद श्रीकृष्ण अर्जुन ने यहां शस्त्र धोकर पितरों की शांति के लिए पूजा अर्चना की।
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हरियाणा के यमुनानगर में कपालमोचन तीर्थ
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कहा जाता है कि कलयुग के आगमन से पहले ब्रह्मा हत्या से मुक्त होने को शिवजी ने यहां यज्ञ किए। किवदंती के अनुसार भगवान शिव को ब्रह्मा जी का एक सिर काटने पर कपाली लग गई थी। जिसे दूर करने के लिए उन्होंने हर प्रयास किया। लेकिन सफलता नहीं मिली।
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हरियाणा के यमुनानगर में कपालमोचन तीर्थ
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फिर भवानीपुर गांव में गऊ बच्छा की कहानी सुनकर पार्वती के आग्रह पर शिवजी ने यहां के कपालमोचन सरोवर में स्नान कर उस कपाली से मुक्ति पाई थी। जिस कारण इस पवित्र सरोवर का नाम कपालमोचन पड़ गया है। चांद के आकार का होने पर इस सोमसर के नाम भी जाना जाता है।