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बागवानी का शौक हो तो ऐसा.. 25 साल पहले एक क्यारी से की शुरुआत, अब उगा रहीं ये सब्जियां

Tue, 17 Nov 2020 08:52 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 17 Nov 2020 08:52 PM IST
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Motivational Kitchen gardening story of a elderly woman of Chandigarh
दलबीर कौर अपने बगीचे में पति गुरसेवक सिंह के साथ। - फोटो : अमर उजाला

25 साल पहले एक क्यारी से बागवानी का सफर शुरू कर आज घर में ही 20 से ज्यादा सब्जियां चंडीगढ़ की दलबीर कौर उगा रहीं हैं। दलबीर कौर 25 साल से किचन गार्डनिंग कर रही हैं। वह पंजाब के मोगा की रहने वाली हैं। वहां उनके घर माली बागवानी करता था। खास बात यह है कि दलबीर कौर ने बागवानी की शुरुआत खुश रहने के उद्देश्य से की थी और अब पूरा दिन इसी में गुजारती हैं।

Motivational Kitchen gardening story of a elderly woman of Chandigarh
- फोटो : अमर उजाला

दलबीर कौर साल 1993 में मोगा से चंडीगढ़ आ गईं। यहां सेक्टर- 8 स्थित घर पर ही बागवानी कर रही हैं। उनका कहना कि चंडीगढ़ आने के बाद उनके पास कोई ऐसा काम नहीं था जिससे उन्हें खुशी मिले सके। इसके बाद उन्होंने बागवानी करने का विचार बनाया। 

Motivational Kitchen gardening story of a elderly woman of Chandigarh
- फोटो : अमर उजाला

दलबीर कौर ने बताया कि एक क्यारी से उन्होंने बागवानी शुरू की। इसमें उन्होंने हरी मिर्च, पुदीना और लहसुन बोया। इन्हें हरा-भरा देखकर उनका हौसला बढ़ा और इसके साथ ही उनका किचन गार्डन भी बढ़ता गया। आज उनके बगीचे में लाल, हरी, पीली शिमला मिर्च, गोभी, पत्ता गोभी जैसी 20 से ज्यादा सब्जियां लगी हैं। अब वह 40 फुट जगह में मौसमी सब्जियां लगा रही हैं। अब तो बागवानी की ऐसी लत लग गई है कि इसके बिना वह नहीं रह सकती। 

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Motivational Kitchen gardening story of a elderly woman of Chandigarh
- फोटो : अमर उजाला

पूरा दिन करती हैं बगीचे की देखभाल
उन्होंने बताया कि सुबह माली केवल एक घंटे के लिए आता है। तब वह एक घंटा माली के साथ लगाती है। उसके बाद पूरा दिन अकेले बगीचा देखती हैं। इसके अलावा उनके घर में 100 से ज्यादा गमले हैं, जिनकी देखभाल वह अकेले ही करती हैं। इसमें 30 से ज्यादा प्रकार के फूल लगे हुए हैं। 

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- फोटो : अमर उजाला

दवाइयां घर पर ही करती हैं तैयार
उन्होंने बताया कि घर पर 20-20 लीटर की बाल्टियां रखी हुई हैं। इसमें वह तीन तरह की दाल और गुड़ भिगो देते हैं। लगभग 15 दिन के बाद वह डी-कंपोजर दवाई तैयार हो जाती है, जिसमें तेल मिलाकर दवाई तैयार की जाती है। इससे सब्जियों में कीड़ा नहीं लगता। इसके अलावा यूरिया आदि वह मार्केट से लेकर आती हैं। लोग उनके घर पर आकर उनके किचन गार्डन की तारीफ करते हैं और उनसे सब्जियां भी ले जाते हैं।

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