कोविड-19 महामारी की मार झेल रहे छोटे निवेशकों को सरकार ने बचत के मोर्चे पर राहत दी है। पीपीएफ, सुकन्या और डाकघर योजनाओं में निवेश पर जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। बाजार विश्लेषकों ने आशंका जताई थी कि बांड से प्रतिफल में गिरावट की वजह से लघु बचत योजनाओं के ब्याज में एक बार फिर कटौती की जा सकती है।
पीपीएफ-सुकन्या जैसी छोटी बचत योजना पर नहीं घटी ब्याज दर, जानें कितना बढ़ेगा आपका रुपया
- राहत...सरकार ने जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए नहीं बदला ब्याज
- 1.40% तक कटौती की थी अप्रैल-जून तिमाही के लिए लघु बचत योजनाओं में
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वित्त मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, चालू तिमाही में इन बचत योजनाओं के ब्याज में कटौती नहीं की गई है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही की ब्याज दरों को दूसरी तिमाही में भी बरकरार रखा गया है। 30 सितंबर, 2020 तक योजनाओं पर समान ब्याज मिलता रहेगा।
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मंत्रालय हर तिमाही की शुरुआत में लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरें तय करता है। इससे पहले अप्रैल-जून तिमाही के लिए ब्याज दरों में 0.70 फीसदी से 1.40 फीसदी तक बड़ी कटौती की थी। अगर इस बार भी पीपीएफ की दरों में कटौती की जाती, तो इसका ब्याज 46 साल के निचले स्तर पर पहुंच जाता।
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2016 से शुरू हुई तिमाही व्यवस्था
लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरों में बदलाव की तिमाही प्रक्रिया 2016 से शुरू की गई है। इससे पहले इन योजनाओं पर ब्याज का निर्धारण सालाना आधार पर होता था। दरअसल, तिमाही आधार पर दरें तय करने का फॉर्मूला श्यामला गोपीनाथ कमेटी ने प्रस्तावित किया था।
समिति ने सुझाव दिया था कि इन योजनाओं का ब्याज समान परिपक्वता अवधि वाले सरकारी बांड के प्रतिफल से कम से 0.25-1 फीसदी ज्यादा होना चाहिए। हालांकि, सरकार ने इसकी ब्याज दरें बांड प्रतिफल से करीब दो फीसदी तक ज्यादा रखी हैं।
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| योजना | ब्याज दर |
| डाकघर बचत जमा | 4.00% |
| रिकरिंग जमा खाता | 5.80% |
| सावधि जमा खाता | 5.50% |
| 5 साल सावधि जमा | 6.70% |
| मासिक आय योजना | 6.60% |
| वरिष्ठ नागरिक बचत | 7.40% |
| पीपीएफ | 7.10% |
| सुकन्या समृद्धि | 7.60% |
| एनएससी | 6.80% |
| किसान विकास पत्र | 6.90% |
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