निवेश के मंत्र 53: म्यूचुअल फंड महंगा: निवेश जोखिम के अधीन है.. समझें, लाख रुपये पर 5 रुपये का पूरा फंडा
कैसे होगी शुल्क की गणना
सबसे पहले तो यह जान लें कि शुल्क की गणना कुल निवेश पर की जाएगी। यह शुल्क डेट और इक्विटी दोनों तरह के फंडों पर समान रूप से लागू होगा। इतना ही नहीं निवेशक अगर म्यूचुअल फंड के सिस्टमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान (सिप), सिस्टमेटिक ट्रांसफर प्लान (एसटीपी), लंपसम या लाभांश का पुनर्निवेश करते हैं, तो यहां स्टांप शुल्क चुकाना पड़ेगा। म्यूचुअल फंड में किए गए कुल निवेश का 0.005 फीसदी स्टांप शुल्क देना होगा, जबकि ट्रांसफर शुल्क ज्यादा लगेगा।
डीमेट अकाउंट में फंड ट्रांसफर पर भी शुल्क लगेगा
फंड को डीमैट अकाउंट में ट्रांसफर किए जाने पर 0.015 फीसदी शुल्क का भुगतान करना पड़ेगा। यानी 1 लाख रुपये के निवेश पर 5 रुपये स्टांप शुल्क और इतने का ही फंड ट्रांसफर करने पर 15 रुपये शुल्क चुकाना पड़ेगा। पहले म्यूचुअल फंड पर स्टांप शुल्क इस साल जनवरी से ही लगने वाला था, लेकिन इसे टालकर अप्रैल किया गया और फिर बढ़ाकर 30 जून कर दिया था।
बेचने पर नहीं देना होगा शुल्क
म्यूचुअल फंड इकाइयों की बिक्री पर स्टांप शुल्क नहीं वसूला जाएगा। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल के अनुसार, नया नियम एक तरह से इंट्री लोड की तरह होगा। सेबी ने इस नियम को 2009 में ही खत्म कर दिया था, ताकि म्यूचुअल फंड निवेश को बढ़ावा दिया जा सके। अगर स्टांप शुल्क के रूप में दोबारा यह भार लादा जाता है, तो इसका सीधा असर निवेशकों पर होगा।
छोटी अवधि के निवेशकों पर बड़ा असर
स्टांप शुल्क का सबसे ज्यादा असर डेट फंड पर होगा, जो आमतौर पर छोटी अवधि के होते हैं। ऐसे निवेशक जो 30 दिन या उससे कम समय के लिए पैसे लगाते हैं, उनके रिटर्न पर इसका बड़ा असर दिखाई देगा। एक सप्ताह या कुछ दिन के लिए निवेश किए जाने वाले लिक्विड फंडों पर अगर अभी तक 3.5 फीसदी का रिटर्न मिलता है, तो यह घटकर 3.24 फीसदी हो जाएगा। इसी तरह, 30 दिन के फंड पर रिटर्न घटकर 3.44 फीसदी और 90 दिन की अवधि पर 3.48 फीसदी हो जाएगा।