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निवेश के मंत्र 53: म्यूचुअल फंड महंगा: निवेश जोखिम के अधीन है.. समझें, लाख रुपये पर 5 रुपये का पूरा फंडा

Wed, 01 Jul 2020 04:31 AM IST
योगेश साहू बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Wed, 01 Jul 2020 04:31 AM IST
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Explained: How stamp duty on mutual fund purchases will impact investors, MF investments are subject to market risk, Investmen in MF is expensive from july 1
पैसा
म्यूचुअल फंड इंवेस्टमेंट्स आर सब्जेक्क्ट टू मार्केट रिस्क यानि म्यूचुअल फंड निवेश बाजार के जोखिम के अधीन है। यह पंक्ति आपने अक्सर पढ़ी और सुनी होगी। इसका उल्लेख यहां इसलिए क्योंकि 1 जुलाई, 2020 से म्यूचुअल फंड में निवेश करना महंगा हो जाएगा। निवेशकों को अब फंड की इकाई खरीदने के लिए स्टांप शुल्क चुकाना होगा। साथ ही इसे ट्रांसफर करने पर भी स्टांप शुल्क लगेगा। आइए समझते हैं म्यूचुअल फंड में लाख रुपये पर 5 रुपये का पूरा फंडा...
Explained: How stamp duty on mutual fund purchases will impact investors, MF investments are subject to market risk, Investmen in MF is expensive from july 1
निवेश - फोटो : पेक्सेल्स

कैसे होगी शुल्क की गणना
सबसे पहले तो यह जान लें कि शुल्क की गणना कुल निवेश पर की जाएगी। यह शुल्क डेट और इक्विटी दोनों तरह के फंडों पर समान रूप से लागू होगा। इतना ही नहीं निवेशक अगर म्यूचुअल फंड के सिस्टमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान (सिप), सिस्टमेटिक ट्रांसफर प्लान (एसटीपी), लंपसम या लाभांश का पुनर्निवेश करते हैं, तो यहां स्टांप शुल्क चुकाना पड़ेगा। म्यूचुअल फंड में किए गए कुल निवेश का 0.005 फीसदी स्टांप शुल्क देना होगा, जबकि ट्रांसफर शुल्क ज्यादा लगेगा। 

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Investment - फोटो : Amar Ujala

डीमेट अकाउंट में फंड ट्रांसफर पर भी शुल्क लगेगा
फंड को डीमैट अकाउंट में ट्रांसफर किए जाने पर 0.015 फीसदी शुल्क का भुगतान करना पड़ेगा। यानी 1 लाख रुपये के निवेश पर 5 रुपये स्टांप शुल्क और इतने का ही फंड ट्रांसफर करने पर 15 रुपये शुल्क चुकाना पड़ेगा। पहले म्यूचुअल फंड पर स्टांप शुल्क इस साल जनवरी से ही लगने वाला था, लेकिन इसे टालकर अप्रैल किया गया और फिर बढ़ाकर 30 जून कर दिया था।

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निवेश

बेचने पर नहीं देना होगा शुल्क
म्यूचुअल फंड इकाइयों की बिक्री पर स्टांप शुल्क नहीं वसूला जाएगा। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल के अनुसार, नया नियम एक तरह से इंट्री लोड की तरह होगा। सेबी ने इस नियम को 2009 में ही खत्म कर दिया था, ताकि म्यूचुअल फंड निवेश को बढ़ावा दिया जा सके। अगर स्टांप शुल्क के रूप में दोबारा यह भार लादा जाता है, तो इसका सीधा असर निवेशकों पर होगा।

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निवेश

छोटी अवधि के निवेशकों पर बड़ा असर
स्टांप शुल्क का सबसे ज्यादा असर डेट फंड पर होगा, जो आमतौर पर छोटी अवधि के होते हैं। ऐसे निवेशक जो 30 दिन या उससे कम समय के लिए पैसे लगाते हैं, उनके रिटर्न पर इसका बड़ा असर दिखाई देगा। एक सप्ताह या कुछ दिन के लिए निवेश किए जाने वाले लिक्विड फंडों पर अगर अभी तक 3.5 फीसदी का रिटर्न मिलता है, तो यह घटकर 3.24 फीसदी हो जाएगा। इसी तरह, 30 दिन के फंड पर रिटर्न घटकर 3.44 फीसदी और 90 दिन की अवधि पर 3.48 फीसदी हो जाएगा। 

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