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इस आइलैंड पर चारों ओर फैला है जहरीला रेगिस्तान, यहां जाने से कतराते हैं लोग

Fri, 21 Feb 2020 11:02 AM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Fri, 21 Feb 2020 11:02 AM IST
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worlds most dangerous island vozrozhdeniya surrounded by poisonous desert
वोजरोझडेनीया द्वीप - फोटो : Social media

मध्य एशिया में कजाखस्तान-उज्बेकिस्तान की सीमा पर एक छोटा सा द्वीप है। ये चारों तरफ से जहरीले रेगिस्तान से घिरा हुआ है। अब इसे द्वीप कहना ठीक नहीं होगा, क्योंकि इसके आस-पास की झील यानी अराल सागर अब कमोबेश सूख चुकी है। इस द्वीप का नाम वोजरोझडेनीया है। किसी दौर में ये मछली मारने का बहुत बड़ा ठिकाना था। ये उस वक्त की बात है जब अराल सागर दुनिया की चौथी बड़ी झील हुआ करती थी। लेकिन सोवियत संघ ने इस झील का इतना दुरुपयोग किया कि आज ये झील सूख चुकी है। इस वजह से वोजरोझडेनीया से भी जजीरा होने का खिताब छिन गया है। इस झील तक पानी लाने वाली नदियों का रुख खेतों की सिंचाई के लिए मोड़ दिया गया था। इसी वजह से अराल सागर सूख गया। 



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वोजरोझडेनीया द्वीप - फोटो : Social media

आज ये जगह कीटनाशकों का ढेर है। यहां पर पारा अक्सर 60 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। जिंदगी के निशान के तौर पर यहां सिर्फ सूखे हुए दरख्त दिखते हैं। कभी-कभार यहां पर सुस्ताते हुए ऊंट भी दिख जाते हैं, जो किसी जमाने में यहां चलने वाले बड़े जहाजों की छांव में बैठते हैं। वोजरोझडेनीया द्वीप ने अराल सागर का पानी इतना सोख लिया है कि इसका आकार दस गुना तक बढ़ गया है।

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वोजरोझडेनीया द्वीप - फोटो : Social media

आज की तारीख में वोजरोझडेनीया को दुनिया के सबसे खतरनाक इलाकों में गिना जाता है। एक दौर में यहां पर सोवियत संघ का जैवीय युद्ध की तैयारी का ठिकाना हुआ करता था। सत्तर के दशक से यहां कई भयानक घटनाएं घट चुकी हैं। जैसे कि 1971 में एक वैज्ञानिक बीमार पड़ गई। उसे चेचक की बीमारी हुई थी। उसे चेचक का टीका लगा हुआ था, तब भी वो बीमार पड़ गई। बाद में वो ठीक हो गई, लेकिन चेचक की वजह से उसके भाई समेत तीन और लोगों की मौत हो गई। इस घटना के ठीक एक साल बाद दो लापता लोग एक नाव में मरे हुए पाए गए। कहा जाता है कि उन्हें प्लेग की बीमारी ने मार डाला। इसके बाद पूरे इलाके में बड़ी तादाद में मरी हुई मछलियां पकड़ी जाने लगीं। मई 1988 में 50 हजार के आसपास बारहसिंघे रहस्यमय तरीके से मर गए। इन सब की मौत एक घंटे के अंदर हो गई थी। 

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वोजरोझडेनीया द्वीप - फोटो : Social media

सोवियत संघ के विघटन के बाद यानी 90 के दशक से वोजरोझडेनीया वीरान पड़ा है। इस द्वीप के बारे में ब्रिटिश पत्रकार निक मिडलटन ने 2005 में एक डॉक्यूमेंट्री बनाई थी। निक बताते हैं कि वो एक ब्रिटिश सैन्य जासूस की मदद से इस इलाके में पहुंचे थे। यहां के बारे में कहा जाता था कि सोवियत दौर में यहां जैविक युद्ध के बहुत से तजुर्बे किए गए थे। बहुत से जानलेवा बीमारियों की जड़ समझे जाने वाले बैक्टीरिया यहां पर जमा किए गए थे। निक ने बताया कि वो मास्क, रबर बूट और ऑक्सिजन टैंक जैसे बहुत से एहतियात लेकर वोजरोझडेनीया द्वीप पहुंचे थे। 

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वोजरोझडेनीया द्वीप - फोटो : Social media

पश्चिमी देशों को यहां चल रहे रिसर्च के बारे में मालूम था। 1962 के दशक में सीआईए ने हवाई जहाज से इस इलाके की तस्वीरें ली थीं। इन तस्वीरों में इस वीरान इलाके में बने फायरिंग रेंज से लेकर बहुमंजिला इमारतें तक, साफ दिखती थीं। वोजरोझडेनीया को सोवियत संघ ने सैन्य अड्डा बना लिया था। यहां जैविक हथियारों का परीक्षण किया जाता था। हालांकि सोवियत संघ का ये प्रोजेक्ट बेहद खुफिया था। सोवियत संघ के किसी भी नक्शे में इसका जिक्र नहीं मिलता। जिन लोगों को इसके बारे में पता था, वो इसे इसके कोड नेम अर्लास्क-7 के नाम से जानते थे।

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