एक वक्त में चेर्नोबिल में लोगों को जाने की मनाही थी। वजह 33 साल पहले 1986 में हुआ परमाणु हादसा। लेकिन वक्त बीतने के साथ चेर्नोबिल अब धीरे-धीरे रोमांच पसंद करने वाले घुमक्कड़ों को अपनी ओर खींच रहा है। इनमें से कुछ घुमक्कड़ तो ऐसे हैं, जो चेर्नोबिल में हाल ही में सरकार की ओर से खोले गए हॉस्टल में पूरी रात गुजार रहे हैं। दुनिया के सबसे खतरनाक परमाणु हादसे वाली जगह में लोगों की ऐसी दिलचस्पी तनिक हैरान करती है। भारत से यूक्रेन की दूरी करीब पांच हजार किलोमीटर है। यूक्रेन की राजधानी किएव से दो घंटे की दूरी पर 30 किलोमीटर के क्षेत्रफल में चेर्नोबिल एक्सक्लूयजन (निषेध) जोन है। इसे दुनिया की उन चंद खतरनाक जगहों में गिना जाता है, जहां लोग एक तय वक्त तक ही ठहर सकते हैं। ऐसा न करना खतरे को दावत दे सकता है।
दुनिया की एक ऐसी वीरान जगह, जहां जाने के लिए लेनी पड़ती है सरकार से खास इजाजत
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इस जगह कोई यूं ही आसानी से नहीं पहुंच सकता। हमें यहां पहुंचने के लिए सरकार से खास इजाजत और रेडिएशन मॉनीटर करने वाले उपकरणों से लैस होना होता है। हर सुबह एक स्पेशल टूर गाइड और यहां घूमने वाले लोगों के साथ एक बस इस वीरान इलाके में आती है। साल 2011 में यूक्रेन की सरकार के इस जगह को पर्यटकों को खोलने के बाद अब तक हजारों लोग यहां आ चुके हैं। यहां आने वाले लोगों में विदेशी भी शामिल होते हैं। ऐसे में सरकार ने कुछ वक्त पहले ही एक्सक्लूजिव जोन के भीतर एक नया हॉस्टल खोला है। यहां आप सिर्फ 500 रुपये खर्च कर एक रात गुजार सकते हैं। 96 बेड वाले इस हॉस्टल का व्यापार तेजी से बढ़ रहा है। वजह हैं अमेरिका, ब्राजील, चेक रिपब्लिक, पोलैंड और यूके से आने वाले पर्यटक।
हॉस्टल मैनेजर स्विटलाना ग्रित्सेंको बताती हैं, 'जब लोग यहां ठहरने आते हैं तो उन्हें ये साफ तौर पर चेता दिया जाता है कि बाहर रुकना ज्यादा सुरक्षित नहीं है।' चेर्नोबिल पहली नजर में ऐसा मालूम होता है, जैसे ये अब भी पुराने दौर में अटका हुआ है। लेकिन चेर्नोबिल का ये होस्टल मेहमानों के लिए बनाए गए आधुनिक टी-रूम और तेज स्पीड वाले वाई-फाई से लैस है।
चेर्नोबिल घूमने के अनुभव वाकई अजब गजब हैं। पर्यटकों को रेडिएशन चैक से होकर गुजरना होता है। यहां बच्चों को जाने की इजाजत नहीं है। इस बात को लेकर सख्त नियम हैं कि चेर्नोबिल की किस जगह बिलकुल नहीं जाना है और किसी भी चीज को हाथ नहीं लगाना है।
यहां जाने से पहले गाइड एक पेपर साइन करवाते हैं। इस पेपर में यहां के नियम और शर्तें लिखी हुई हैं। गाइड बताते हैं कि क्या खाना है, क्या पीना और घूम्रपान करना है या नहीं करना है। इस जगह से जाने से पहले जो रेडिएशन चैक होता है। उस चैक में फेल होने पर यहां आए लोगों को अपने जूते भी यहां छोड़कर जाने पड़ सकते हैं। लेकिन ऐसी चेतावनियों का रोमांच पसंद करने वाले पर्यटकों पर कोई असर पड़ता हुआ नजर नहीं आता है।
अब चेर्नोबिल से 20 किलोमीटर दूर प्रिप्यात की तरफ चलते हैं। 26 अप्रैल 1986 को चेर्नोबिल न्यूक्लियर प्लांट की यूनिट-4 में विस्फोट हुआ था और हवा में रेडियोएक्टिव मटेरियल घुल गया था। इस हादसे के बाद मानों प्रिप्यात के लिए वक्त जैसे थम गया है। इस हादसे के कुछ ही हफ्तों के भीतर 30 कर्मचारी और मदद करने पहुंचे अपनी जान गंवा चुके थे। तब इस इलाके के करीब दो लाख लोगों को बचा लिया गया था।
यहां आने वाले लोग वीरान प्रिप्यात में मलबे से भरी बिल्डिंग्स को लाइन से देख सकते हैं। बर्फ से ढकी कारें और विशाला फेरी व्हील यानी बड़े वाले झूले का पीला रंग अब तक नहीं उतरा है। बच्चों के एक हॉस्टल में पलंग पर एक बच्ची की डॉल देखकर मन में थोड़ा खौफ होता है। यूक्रेन की सरकार का कहना है कि ये जोन खतरनाक नहीं है, बस आपको समझदारी भरा रवैया अपनाना होगा।
यूक्रेन के इकोलॉजी एंड नेचुरल रिसोर्स मिनिस्टर ऑस्टेप सेमेराक बताते हैं, 'आप यहां तभी सुरक्षित महसूस करेंगे, जब आप यहां के नियमों को सख्ती के साथ मानें। जैसे ही आप लापरवाही बरतेंगे, आपकी सेहत को खतरा हो सकता है।' सेमेराक कहते हैं, 'न्यूक्लियर रिएक्टर को ढकने के लिए बनाए गए एक तरह के टेंट को बनाने के लिए करीब 10 हजार लोगों ने चार साल तक काम किया। जाहिर है कि उन्होंने अपनी जिंदगी को खतरे में डालते हुए ये काम किया था।'