बहुत से लोग अब शायद यकीन न करें लेकिन 60 के दशक में रोमानिया में निकोलस चाचेस्कू ने लगातार 25 सालों तक न सिर्फ अपने देश के मीडिया की आवाज नहीं निकलने दी बल्कि खाने, पानी, तेल और यहां तक कि दवाओं तक पर प्रतिबंध लगा दिया। नतीजा ये हुआ कि हजारों लोग बीमारी और भुखमरी के शिकार हो गए और उस पर तुर्रा ये कि उनकी खुफिया पुलिस 'सेक्योरिटेट' ने लगातार इस बात की निगरानी रखी कि आम लोग अपनी निजी जिंदगी में क्या कर रहे हैं। चाचेस्कू को पूरे रोमानिया में 'कंडूकेडर' के रूप में जाना जाता था जिसका अर्थ था 'नेता'। उनकी पत्नी एलीना को राष्ट्रमाता का खिताब दिया गया था।
दुनिया का वो खूंखार तानाशाह, जो शराब से धोता था हाथ
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अपनी परछाई से भी डरते थे रोमानिया के लोग
रोमानिया में भारत के राजदूत रह चुके राजीव डोगरा बताते हैं कि वो जब रोमानिया गए थे तो चाचेस्कू को गए दस साल बीत चुके थे लेकिन तब भी लोगों में उनके प्रति दहशत थी। डोगरा याद करते हैं, "जब मैं अपना पद संभालने रोमानिया पहुंचा तो मैंने पाया कि लोग अपनी छाया से भी घबराते थे। वो जब सड़क पर चलते थे तो हमेशा पीछे मुड़ मुड़ कर देखते थे कि कोई उनका पीछा तो नहीं कर रहा।"
घर की खिड़कियां खुली रखने का हुक्मएक रोमानियाई महिला कार्मेन बुगान के पिता चाचेस्कू के विरोधियों में से थे। खुफिया पुलिस सिक्योरिटेट ने 10 मार्च, 1982 को उनके गांव के घर छापा मारा और अगले पांच सालों तक परिवार ने जो कुछ किया, उस पर नजर रखी और घर के अंदर बोले गए उनके एक-एक शब्द को रिकॉर्ड किया। कार्मेन बुगान ने बीबीसी को बताया, "जब मैं स्कूल से वापस आई तो मैंने देखा कि मेरा पूरा घर पुलिस वालों से भरा हुआ था। वो मेरे पूरे घर में खुफिया माइक्रोफोन लगा रहे थे। वो मेरे माता-पिता की सिगरेट पी रहे थे और बिना पूछे अपने लिए कॉफी बना रहे थे। उस समय मुझे पता नहीं था, लेकिन बाद में मुझे पता चला कि मेरे पिता ने अपनी कार से बुखारेस्ट में चाचेस्कू के खिलाफ पर्चे बांटे थे। मेरे पिता उस समय अंडरग्राउंड थे और मेरी मां अस्पताल में थीं। वो मेरे घर का सारा खाना ले गए और मुझे तीन हफ्तों तक सिर्फ पानी पर ही जिंदा रहना पड़ा।"
कार्मेन कहती हैं, "हमें आदेश दिया गया था कि चाहे जितनी ठंड हो, हम अपने घर की खिड़कियां हमेशा खुली रखें, ताकि वो हम पर नजर रख सकें। जब मैं स्कूल जाती थी तो एक खुफिया एजेंट मेरे पीछे चलता था। मुझे उसका ब्राउन कोट और कैप अभी तक याद है। वो स्कूल छूटने तक गेट पर ही मेरा इंतजार करता था।"
बड़े कद की तस्वीर दिखाने की हिदायतनाटे कद के चाचेस्कू का कद था मात्र 5 फीट 4 इंच, इसलिए पूरे रोमानिया के फोटोग्राफरों को हिदायत थी कि वो उनकी इस तरह तस्वीरें खीचें कि वो सबको बड़े कद के दिखाई दे। 70 की उम्र पार हो जाने के बाद भी उनकी वही तस्वीरें छपती थीं जो उनकी 40 साल की उम्र में खीचीं गई थीं। एलीना को तो ये तक पसंद नहीं था कि कोई सुंदर महिला उनके बगल में खड़े हो कर तस्वीर खिंचवाए। एलीना ने कई विषयों में फेल होने के बाद 14 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़ दी थी लेकिन रोमानिया की फर्स्ट लेडी बनने के बाद उन्होंने ऐलान करवा दिया था कि उनके पास रसायन शास्त्र में 'पीएचडी' की डिग्री है। जाहिर है ये डिग्री जाली थी।
अरबों डॉलर खर्च कर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा भवन बनवाया
चाचेस्कू रोमानिया को एक विश्व शक्ति बनाना चाहते थे। इसके लिए जरूरी था बड़ी जनसंख्या का होना। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने 'एबॉर्शन' यानी गर्भपात पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसी वजह से पूरे रोमानिया में तलाक लेना भी मुश्किल बना दिया गया था। चूंकि चाचेस्कू छोटे कद के थे, वो हर चीज बड़ी पसंद करते थे। उन्होंने राजधानी बुखारेस्ट में अरबों डॉलर खर्च कर 'पीपुल्स हाउज' बनवाया था जिसका हीटिंग और बिजली का खर्च आज के जमाने में लाखों डॉलर का आता है और भवन बन जाने के 25 साल बाद भी इसके 70 फीसदी कमरे अभी तक खाली हैं। करीब 15,000 मजदूर इस भवन को बनाने में लगे हुए थे और वो तीन शिफ्टों में काम करते थे। वो अक्सर इस भवन का मुआएना करने जाते थे। दिसंबर, 1989 आते आते वो वहां सप्ताह में तीन चार बार आने लगे थे।
चाचेस्कू की जीवनी 'द लाइफ एंड ईविल टाइम्स ऑफ निकोलाई चाचेस्कू' लिखने वाले जॉन स्वीनी लिखते हैं, "15000 मजदूरों के लिए वहां एक भी 'टायलेट' नहीं था। इसलिए जहां भी किसी मजदूर को मौका मिलता, वो अपने आपको हल्का कर लेता। पूरे भवन में बुरी तरह से बदबू फैली हुई थी। जब भी चाचेस्कू के आने की खबर मिलती, मजदूरों का एक दल दौड़ कर उस इलाके की गंदगी को साफ कर देता जहां चाचेस्कू को जाना होता था। एक दिन चाचेस्कू साफ किए गए इलाके से थोड़ा भटक गए और ऐसी जगह मुड़ गए जहां थोड़ा अंधेरा था। अंधेरे में उनका पैर मल के ढेर पर पड़ा और उनके दोनों जूते इससे बुरी तरह सन गए।"