धरती पर 21 दिसंबर यानी आज का दिन सबसे छोटा होता है। इसकी वजह से 21 दिसंबर को सूर्य सिर्फ 8 घंटे तक रहता है और रात 16 घंटे की होती है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस दिन में हर साल बदलाव होता है। बीते साल 22 दिसंबर को सबसे छोटा दिन था। धरती पर सबसे छोटे दिन को विंटर सॉल्सटिस (Winter solstice) भी कहा जाता है। आईए जानते हैं क्या है इसके पीछे की पूरी कहानी...
Winter Solstice 2021: क्यों साल के सबसे छोटे दिन के बाद बढ़ती है ठंड, जानिए क्या होता है विंटर सॉल्सटिस?
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दुनिया के एक इलाके में सबसे लंबा दिन, दूसरे में सबसे छोटा दिन
Winter Solstice के समय दक्षिणी गोलार्द्ध में सूर्य की किरणें ज्यादा पड़ती हैं, तो वहीं उत्तरी गोलार्द्ध में कम। इसकी वजह से उत्तरी गोलार्द्ध में रात लंबी होती है और दिन छोटा। दक्षिणी गोलार्ध में आज के दिन सूर्य सबसे ज्यादा देर तक रहता है और इस इलाके में पड़ने वाले देशों में आज के दिन सबसे बड़ा दिन होता है। अर्जेंटिना, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में आज से गर्मी की शुरुआत हो जाती है।
धरती की पोजिशन की वजह से एक इलाके में आज के दिन सबसे बड़ा दिन होता है, तो दूसरे इलाके में सबसे छोटा दिन। दूसरे ग्रहों की तरह पृथ्वी भी 23.5 डिग्री पर झूकी हुई है। झुके हुए अक्ष पर पृथ्वी के घूमने से सूर्य की किरणें एक जगह अधिक और दूसरी जगह कम पड़ती हैं।
बढ़ जाती है सूर्य से दूरी
उत्तरी गोलार्ध साल में 6 महीने सूर्य की ओर झुका रहता है जिससे सूर्य की अच्छी रोशनी यहां पड़ती है और इन महीनों के दौरान यहां गर्मी पड़ती है। इसके बाद बाकी 6 महीने ये इलाका सूर्य से दूर रहता है और दिन छोटा होने लगता है।
उत्तरायण से दक्षिणायन होता है सूर्य
आज के दिन सूर्य कर्क रेखा से मकर रेखा की तरफ यानी उत्तरायण से दक्षिणायन की ओर आता है। इस दिन से ठंड और बढ़ती है और बर्फबारी ज्यादा होने लगती है।