कोविड-19 महामारी के दौर में सोने के दाम आसमान छूने लगे। अचानक सोने की कीमत में उछाल आया। पिछले साल ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने के उत्पादन में एक प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। सोने के उत्पादन में आई ये पिछले एक दशक की सबसे बड़ी गिरावट है। कुछ जानकारों का तर्क है कि खदानों से सोना निकालने की सीमा अब पूरी हो चुकी है। जब तक सोने की खदानों से खनन पूरी तरह से बंद नहीं किया जाएगा, सोने का उत्पादन गिरता रहेगा।
आखिर खदानों से सोना निकालना इतना मुश्किल क्यों होता जा रहा है?
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सोने के ऊंचे दाम होने की वजह भी यही है कि अमेजन के जंगलों में सोने की खदानों में बड़े पैमाने पर अवैध खनन का काम हुआ है। सोने की कीमत में उछाल भले ही आ गया हो, लेकिन इसकी मांग में कोई कमी नहीं आई है। CFR इक्विटी रिसर्च के एक्सपर्ट जानकार मैट मिलर का कहना है कि सोने की जितनी मांग इन दिनों है, उससे ज्यादा पहले कभी नहीं थी।
मिलर के मुताबिक दुनिया में पाए जाने वाले कुल सोने का लगभग आधा हिस्सा जूलरी बनाने में इस्तेमाल होता है। इसमें वो हिस्सा शामिल नहीं है, जो जमीन में दफन है। बाकी बचे आधे सोने में से एक चौथाई केंद्रीय बैंकों से नियंत्रित किया जाता है जबकि बाकी का सोना निवेशकों या निजी कंपनियों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है।
सोना - भरोसेमंद संपत्ति
मिलर का कहना है कि कोविड-19 की वजह से पूरे विश्व का आर्थिक तंत्र चरमरा गया है। अमेरिकी डॉलर से लेकर रुपया तक कमजोर हुआ है। लगभग सभी देशों के सरकारी खजाने का बड़ा हिस्सा महामारी नियंत्रण पर खर्च हो रहा है। करंसी की छपाई के लिए भारी रकम उधार ली जा रही है। जानकारों का कहना है कि इसी वजह से करंसी का मूल्य ज्यादा अस्थिर हो गया है। वहीं दूसरी ओर निवेशक सोने को भरोसेमंद संपत्ति मानते हैं।
कोरोना महामारी ने सोने के खनन कार्य को भी प्रभावित किया है। निकट भविष्य में इसकी आपूर्ति बढ़ने की संभावना भी नहीं है। मिलर का कहना है कि सोने की मांग अभी इसी तरह बढ़ती रहेगी और बाजार में अभी जो सोना आ रहा है वो ज्यादातर रिसाइकिल किया हुआ है। मिलर तो यहां तक कहते हैं कि आने वाले समय में रिसाइकिल सोना, सोने के सिक्के यहां तक कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के सर्किट बोर्ड में इस्तेमाल होने वाला सोना भी भविष्य में इस धातु का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन जाएगा। एक रिसर्च से पता चलता है कि पिछले 20 वर्षों में सोने की जितनी आपूर्ति हुई है, उसका 30 फीसद हिस्सा रिसाइकिलिंग से ही आया है।
खनन का विरोध
सोने की रिसाइकिलिंग में कुछ जहरीले रसायनों का इस्तेमाल होता है, जो पर्यावरण के लिए घातक हैं। फिर भी ये सोने के खनन की प्रक्रिया से कम ही घातक है। जर्मनी की गोल्ड रिफाइनरी की हालिया रिसर्च बताती है कि एक किलो सोना रिसाइकल करने में 53 किलो या उसके आसपास कार्बन डाईऑक्साइड निकलती है। जबकि खान से इतना ही सोना निकालने में 16 टन या उसके बराबर कार्बन डाईऑक्साइड निकलती है।