पासपोर्ट के बारे में तो अधिकतर लोग जानते ही होंगे, फिर भी आपको बता दें कि यह किसी भी देश की सरकार द्वारा जारी वह दस्तावेज होता है, जो अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए किसी भी व्यक्ति की पहचान और उसकी राष्ट्रीयता को प्रमाणित करता है। इसके बिना कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे देश में जाकर नहीं रह सकता है। ऐसा करना गैरकानूनी होता है और इसके लिए उसे कड़ी से कड़ी सजा हो सकती है। पासपोर्ट बनाने के दौरान पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पुलिस क्या वेरिफिकेशन करती है?
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
पासपोर्ट बनवाने के लिए हम जब आवेदन करते हैं, तो हमारे द्वारा दी गई सूचनाओं की जांच करने के लिए पुलिस व्यक्तिगत तौर पर आवेदक के बताए पते पर पहुंचती है। आवेदक बताए हुए पते पर कब से है, क्रिमिनल रिकॉर्ड क्या रहा है, जैसी कई बातों की जांच कर पुलिस यह तय करती है कि आवेदन में दी गई जानकारी कितना सही है। वहीं आवेदक के खिलाफ अगर कोई पुलिस या कोर्ट केस पेंडिंग हो, तो पुलिस इसके बारे में भी पूरी जानकारी पासपोर्ट दफ्तर को पहुंचाती है।
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पासपोर्ट बनवाने के लिए साधरण तौर पर पुलिस जांच तीन तरह से रिपोर्ट होती है। पहला क्लीयर, दूसरा तथ्यपूर्ण या फिर अनुशंसनीय नहीं। पहली रिपोर्ट में सब कुछ ठीक होता है। दूसरी रिपोर्ट में पुलिस एक तरह से फैसला पासपोर्ट दफ्तर के विवेक पर छोड़ देती है। वहीं तीसरी रिपोर्ट का ये मतलब होता है कि पेश किए गए दस्तावेज़ उचित नहीं थे। ऐसे में पुलिस पासपोर्ट जारी नहीं करने की सिफारिश करती है। हालांकि, पासपोर्ट दोबारा जारी किए जाने पर स्थितियां सामान्य हों, तो वेरिफिकेशन नहीं होता है।
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बता दें कि पासपोर्ट बनाने के लिए पुलिस केवल उन्हीं मामलों को ध्यान में रखती है, जिनमें एफआईआर या किसी तरह की कोर्ट कार्यवाही हो। पासपोर्ट एक्ट 1967 या पासपोर्ट रूल्स 1980 में कहीं ऐसा दर्ज नहीं है कि पुलिस आवेदक के सामाजिक या राजनीतिक बर्ताव को जांचे और इसे वैधानिक चेतावनी के तौर पर दर्ज करे। इतना ही नहीं ट्रैफिक सिगनल या अन्य ट्रैफिक नियम तोड़े जाने के मामले भी पासपोर्ट जांच में रोड़ा नहीं होते हैं।
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हालांकि, कई बार अदालतें कई मौकों पर यह बात कह चुकी हैं कि सिर्फ एफआईआर या कोर्ट केस के आधार पर किसी को पासपोर्ट से तब तक वंचित नहीं किया जा सकता, जब तक कोर्ट इस तरह के निर्देश न दे। कोर्ट की इजाजत लेकर ऐसे आवेदक भी विदेश यात्रा कर सकते हैं, जिसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला हो।