Janmashtami 2022: इस साल श्री कृष्ण जन्माष्टमी 19 अगस्त को मनाई जाएगी। हिन्दू धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व है। भगवान श्री कृष्ण की लीलाएं हम सभी के मन में रची बसी हैं। भगवान श्री कृष्ण की प्रेम लीला भी बेहद प्रचलित है। भगवान श्री कृष्ण और राधा जी का नाम हर किसी के मन में रहता है। भगवान श्री कृष्ण राधा से इतना प्रेम करते थे कि जब वह उनसे दूर हुए थे, तो अपनी बांसुरी को तोड़ दिया था और फिर कभी बांसुरी नहीं बजाई।
Janmashtami 2022: जब राधा ने श्री कृष्ण को छूने से कर दिया था मना, अरिष्टासुर को मारने से थीं नाराज
भगवान श्री कृष्ण के बचपन से कई लीलाएं जुड़ हुई हैं। उन्होंने कंस से पहले कई राक्षसों का वध किया था। श्री कृष्ण ने पूतना से लेकर दानव बैल अरिष्टासुर तक को मारा था। श्री कृष्ण के मामा कंस ने उनको मारने के लिए अरिष्टासुर (वृषभासुर) को भेजा था, लेकिन भगवान कृष्ण ने युद्ध में राक्षस का वध कर दिया।
पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण अपने मित्रों के साथ गायों को चरा रहे थे। तभी श्री कृष्ण को मारने के लिए राक्षस अरिष्टासुर बैल का वेश धारण कर वहां पहुंचा और गायों को मारने लगा। इसके बाद भगवान श्री कृष्ण और अरिष्टासुर के बीच युद्ध हुआ। इस युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण ने अरिष्टासुर नाम के राक्षस का वध कर दिया।
दरअसल अरिष्टासुर बैल का रूप धारण कर श्री कृष्ण को मारने के लिए आया था, इसकी वजह से राधा और गोपियों ने अरिष्टासुर के वध को गौ हत्या मान लिया। इसके बाद राधा जी ने श्री कृष्ण को गौ हत्यारा मानकर छूने से मना कर दिया। लेकिन भगवान श्री कृष्ण ने राधा को समझाया कि वह एक राक्षस था।
भगवान श्री कृष्ण ने राधा को बताया कि उन्होंने एक राक्षस का वध किया है किसी बैल को नहीं मारा है। लेकिन इसके बाद भी राधा नहीं मानीं। फिर भगवान श्री कृष्ण ने अपनी एड़ी को जोर से पटका जिससे वहां जल की धारा फूट गई और एक कुंड बन गया। भगवान श्री कृष्ण ने सभी तीर्थों को यहां पर बुलाया और इसके बाद सभी कुंड में चले गए। फिर श्री कृष्ण ने कुंड में स्नान किया जिसके बाद उनको सभी तीर्थों का पुण्य मिल गया। यह कुंड आज भी गोवर्धन पर्वत की तलहटी में स्थित है।