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दुनिया की वो खुफिया लाइब्रेरी, जहां रखी हैं हजारों साल पुरानी 'गुप्त' किताबें

Mon, 16 Dec 2019 03:03 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Mon, 16 Dec 2019 03:03 PM IST
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Secret library where thousands years old books are kept
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

पेट की आग बुझाने के लिए इंसान खाना खाता है, दिमाग की भूख मिटाने के लिए उसे इल्म की जरूरत होती है। ये ज्ञान मिलता है किताबों से। भाषा के वजूद में आने के साथ ही इंसान ने लिखने का काम शुरू किया। फिर लिखे गए दस्तावेज सुरक्षित रखे जाने लगे। लाइब्रेरी का चलन हाल के कुछ दशकों की देन नहीं बल्कि इसका चलन एक जमाने से चला आ रहा है। खुदाई करने पर जिन नई सभ्यताओं के बारे में जानकारियां मिलीं, वहां लाइब्रेरी होने के निशान भी मिले। दुनिया के बहुत से देशों में खुफिया लाइब्रेरी मौजूद हैं, जहां हजारों साल पुरानी किताबें संभालकर रखी हुई हैं। 

Secret library where thousands years old books are kept
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

सीरिया में चार साल पहले राजधानी दमिश्क के करीब दारेया की घेरेबंदी के दौरान लोगों ने करीब 14 हजार किताबों को बमबारी से बचाया। असल में ये किताबें दारेया में रहने वाले लोगों ने अपनी इमारतों के खुफिया ठिकानों में छुपा रखी थीं। यहां के लोगों को डर था कि इन किताबों की वजह से राष्ट्रपति असद की समर्थक सेना उन्हें निशाना बना सकती है। जब जंग जारी थी, तो लोगों ने इन किताबों को बचाने की जुगत भिड़ाई। बमबारी से बर्बाद हो रही इमारतों से किताबें निकालकर नए खुफिया ठिकाने पर ले जाई गईं। और इस तरह तैयार हुई सीरिया की खुफिया लाइब्रेरी।

Secret library where thousands years old books are kept
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

सन् 1900 में चीन के दानहुंग के पास एक गुफा पाई गई। कहते हैं ये गुफा करीब एक हजार साल से बंद थी। यहां 11वीं सदी की हस्तलिपि पाई गईं। जब सूबे के जिम्मेदार अफसरों को इसकी इत्तिला दी गई, लेकिन उन्होंने कुछ खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसके बाद गुफा तलाशने वाले साधु, वांग युआनलू ने ही इन एतिहासिक दस्तावेजों को संभालने की जिम्मेदारी ले ली। इस गुफा की जानकारी धीरे-धारे आस-पास के इलाकों में फैलने लगी। हंगरी के शहरी ऑरेल स्टीन ने करीब दस हजार हस्तलिपियां यहां से खरीद लीं। इसके बाद रूस, फ्रांस और जापान से आए लोगों ने भी यहां से जानकारी के इस खजाने को ले जाना शुरू कर दिया। 

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Secret library where thousands years old books are kept
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

अमेरिकी मैग्जीन न्यूयॉर्कर के मुताबिक, 1910 में चीनी प्रशासन ने इन दस्तावेजों को बीजिंग के हवाले करने का आदेश दिया, तब तक यहां से अस्सी फीसदी एतिहासिक दस्तावेज दूसरे देशों में जा चुके थे। 1994 में इन दस्तावेजों का डिजिटलाइजेशन शुरू किया गया। इसमें कई और देशों ने भी दिलचस्पी ली। चीन की गुफा से मिले दस्तावेजों के डिजिटलाइजेशन का फायदा ये है कि आज कई एतिहासिक जानकारियां लोग घर बैठे हासिल कर सकते हैं। उन्हें मालूम हो जाता है कि नक्षत्रों की चाल पर आधारित पहला कैलेंडर कब तैयार हुआ। या फिर ये कि मध्य पूर्व के बेबीलोन से चीन जाने वाले व्यापारी हिब्रू भाषा में दुआ पढ़ते थे।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

इस गुफा को बंद क्यों किया गया, इस पर अलग अलग राय है। ऑरेल स्टीन का मानना था कि इन हस्तलिपियों का बहुत उपयोग नहीं रह गया होगा। तभी इन्हें इस गुफा में एक ढेर की शक्ल में जमा कर दिया गया। जबकि फ्रांस के एक जानकार पॉल पैल्योट मानते हैं कि सन 1053 में जब चीन के ची चिया साम्राज्य ने इस इलाके पर हमला किया तो गुफा बंद की गई। वहीं चीन के एक जानकार रॉन्ग जिनजियांग कहते हैं कि इस गुफा को इस्लामिक हमलावरों के डर से बंद किया गया। ब्रिटिश लाइब्रेरी के अनुसार इस गुफा से सन् 868 की एक प्रिंटेड कॉपी भी मिली है। इससे पता चलता है कि सबसे पहले  धार्मिक किताबों की ही छपाई शुरू हुई थी।

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