Santa Claus: वैज्ञानिकों ने बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। उनका दावा है कि उन्होंने सांता क्लॉज का असली चेहरा विकसित कर लिया है। वैज्ञानिकों ने संत निकोलस के खोपड़ी के अवशेष की मदद से फोरेंसिक पद्धति से उनका थ्रीडी चेहरा बनाया है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि सांता क्लॉज का यही असली चेहरा है। करीब 1700 साल बाद सांता क्लॉज का असली चेहरा सामने आया है। वैज्ञानिकों के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। ऐसा पहली बार हुआ है जब इस ऐतिहासिक शख्सियत का असली चेहरा लोग देख सकेंगे।
Santa Claus: वैज्ञानिकों ने 1700 साल बाद बनाया सांता क्लॉज का असली चेहरा, आप भी देखिए तस्वीरें
वैज्ञानिकों ने संत निकोलस ऑफ मायरा का चेहरा उनकी खोपड़ी के आधार पर फिर से विकसित किया। सामने आई तस्वीर में सांता क्लॉज को एक चौड़े माथे, पतले होंठों और गोल नाक के साथ दिखाया है।
अध्ययन के मुख्य लेखक सिसेरो मोरेस ने इंस्टाग्राम पर तस्वीरों को शेयर किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मोरेस ने बताया कि 3डी तस्वीरों से पता चलता है कि उनका चेहरा स्ट्रॉन्ग और जेंटल दोनों था। संत निकोलस की मृत्यु 343 ईस्वी में हुई थी। उनकी कोई तस्वीर नहीं थी।
इस अध्ययन के सह लेखक जोस लुइस लीरा, जो ईसाई संतों के जीवन के विशेषज्ञ हैं उन्होंने संत निकोलस के वास्तविक व्यक्तित्व की गहराई को समझाते हुए कहा कि संत निकोलस प्रारंभिक ईसाई धर्म के दौर में एक बिशप थे। उन्होंने ईसा मसीह की शिक्षाओं का पालन करने और उनका प्रचार करने का काम किया।
तुर्किस्तान के मायरा के संत निकोलस एक प्रारंभिक ईसाई संत थे। संत निकोलस को ही सांता क्लॉज कहा जाता है। मायरा के रोवानिएमी गांव में संत निकोलस का जन्म हुआ था। प्रभु ईसा मसीह की मौत के 280 साल बाद जन्मे संत निकोलस एक अमीर परिवार के रहने वाले थे। वह हमेशा गरीबों की मदद करते थे। वह अपनी उदारता और उपहार बांटने के लिए प्रसिद्ध थे। उनकी उपहार बांटने की आदत डच लोक चरित्र 'सिंटरक्लास' का आधार बनी, जिसे अमेरिका में सांता क्लॉज के तौर पर जाना गया।
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निकोलस प्रभु ईसा मसीह में गहरी आस्था रखते थे जिसकी वजह से वह बाद में पादरी बन गए। इसके बाद बिशप बन गए और उनको संत की उपाधि दी गई। संत निकोलस को कई नामों से पुकारा जाने लगा जिसमें उनका क्रिस क्रींगल, क्रिसमस फादर का नाम प्रसिद्ध है। वह बचपन से ही गरीबों की मदद करते थे।
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संत निकोलस प्रभु ईसा मसीह की भक्ति में लीन रहते थे। वह बच्चों को भी बहुत प्यार करते थे। वह बच्चों को गिफ्ट देना बेहद पसंद करते थे। वह रात के अंधेरे में बच्चों को तोहफा देते थे ताकि उन्हें कोई पहचान ना सके। आज बच्चों के लिए सांता क्लॉज सबसे फेवरेट हैं।
सांता क्लॉज का फिनलैंड में आधिकारिक गांव है जिसका नाम रोवानिएमी है। यहां पर सांता क्लॉज का एक दफ्तर भी है। यहां पर दुनियाभर से लोग पत्र भेजते हैं। सांता के रूप में मौजूद व्यक्ति लोगों के पत्र का जवाब देते हैं।