रूस और यूक्रेन के बीच तनाव चरम पर पहुंचा गया है। दोनों देशों के बीच अब युद्ध का खतरा मंडराने लगा है। यूक्रेन के पूर्वी इलाके में हिंसा हुई है। रूस समर्थक विद्रोही इस इलाके में धमाके कर रहे हैं। हाल ही में विद्रोहियों के हमले में यूक्रेन के दो सैनिकों की मौत हो गई थी। अमेरिका का कहना है कि रूस कभी भी यूक्रेन पर हमला कर सकता है। यूक्रेन की सीमा पर रूस के डेढ़ लाख से ज्यादा सैनिक तैनात हैं। युद्ध की आशंका के बीच रूस ने बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ परमाणु अभ्यास शुरू कर दिया है। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव की वजह से पूरी दुनिया की चिंता बढ़ गई है। संभावना जताई जा रही है कि रूस और यूक्रेन के बीच जंग हुई तो तीसरा विश्व युद्ध भी छिड़ सकता है।
Russia Ukraine Conflict: रूस-यूक्रेन विवाद से क्रीमिया की यादें हुईं ताजा, जानिए रूस ने बिना युद्ध कैसे किया था कब्जा
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यूक्रेन को तोहफे में मिले क्रीमिया की कहानी
रूस ने साल 1954 में यूक्रेन को क्रीमिया तोहफे में दे दिया था। उस समय दोनों देश सोवियत संघ का हिस्सा हुआ करते थे। सोवियत संघ के उस समय के सर्वोच्च नेता निकिता ख्रुश्चेव ने यूक्रेन को क्रीमिया दे दिया था। साल 1991 में सोवियत संघ टूट गया और रूस-यूक्रेन अलग हो गए जिसके बाद दोनों देशों के बीच क्रीमिया को लेकर लड़ाई शुरू हो गई। रूसी साम्राज्य के कैथरीन द ग्रेट के शासन में साल 1783 में मिलाया गया था। क्रीमिया तब से 1954 तक रूस का हिस्सा था। रूसी साम्राज्य की महारानी थीं कैथरीन द ग्रेट।
साल 1991 में यूक्रेन ने अपनी स्वतंत्रता का एलान कर दिया। साल 1994 में यूक्रेन में चुनाव हुए जिसके बाद लियोनिद कुचमा राष्ट्रपति बने। उन्होंने रूस और पश्चिमों देशों के साथ संतुलन बनाने की नीति बनाई। इसके बाद 1996 में यूक्रेन ने अपना नया लोकतांत्रिक संविधान बनाया और अपनी नई मुद्रा जारी कर दी। फिर मार्च 2002 में आम चुनाव हुए जिसमें किसी को बहुमत नहीं मिला। विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया कि चुनाव में धांधली हुई है। मई 2002 में यूक्रेन ने नाटों में शामिल होने की प्रकिया शुरू करने की घोषणा कर दी। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन किसी भी कीमत पर नाटों में यूक्रेन को शामिल नहीं होने देना चाहते हैं।
फरवरी 2010 में आम चुनाव हुए और रूस के समर्थक विक्टर यानुकोविच यूक्रेन की सत्ता पर काबिज हुए। नवंबर में 2013 में यूरोपियन यूनियन के साथ जुड़ने से पीछे हट गए। इस समझौते के बाद यूक्रेन को 15 अरब डॉलर का आर्थिक पैकेज मिलना था। इसके बाद यानुकोविच के फैसले के विरोध में लोग सड़कों पर प्रदर्शन करने लगे। लोगों का कहना था कि उन्होंने रूस के दबाव में यह फैसला लिया है। फरवरी 2014 में राजधानी कीव में सुरक्षाबलों ने दर्जनों प्रदर्शनकारियों को मार डाला जिसके बाद प्रदर्शन हिंसक हो गया और यानुकोविच देश छोड़कर भाग गए। सत्ता पर विपक्ष काबिज हो गया।