70वें गणतंत्र दिवस की परेड में अबकी बार बहुत कुछ पहली बार हुआ है। अभी लोगों में परेड की खुमारी उतरी भी नहीं थी कि विवाद पहले ही सामने आने लगे हैं। इस बार गणतंत्र दिवस परेड में 16 राज्यों की झांकी राजपथ पर देखने को मिली। लेकिन अब तमिलनाडु की झांकी पर विवाद शुरू हो गया है।
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Republic Day 2019 parade
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दरअसल, तमिलनाडु की झांकी में महिलाओं को बिना ब्लाउज के सिर्फ साड़ी में दिखाया गया था। महात्मा गांधी की मदुरै यात्रा को दिखाती इस झांकी में महिलाओं को बिना ब्लाउज सिर्फ साड़ी में दिखाया गया था।
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tamil nadu tableau 2019
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तमिलनाडु सरकार की इस झांकी में महात्मा गांधी की 1921 की मदुरै यात्रा को दिखाया गया था, जिसके बाद उन्होंने कपड़े त्याग दिए थे और सिर्फ एक धोती पहनने का फैसला किया था। ऐसा फैसला उन्होंने यहां के किसानों की दयनीय हालत को देखकर किया था।
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Tableau of Karnataka 2019
- फोटो : PIB
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 22 सितंबर 1921 की मदुरै यात्रा के बारे में बताते हुए राजनीतिक दल द्रविड़ इयक्का तमिझर पेरावई के महासचिव सुबा वीरापांडियन ने कहा कि इस यात्रा के बाद महात्मा गांधी ने सिर्फ एक धोती पहनने का फैसला किया था। यह महात्मा गांधी और तमिलनाडु के लिए अहम घटना थी, लेकिन 1921 में महिलाएं इस तरह कपड़े नहीं पहनती थीं, जैसा झांकी में दिखाया गया है। त्रावणकोर क्षेत्र में महिलाएं इस तरह का पहनावा पहनती थीं, मगर महिलाओं के ब्लाउज पहनने पर बैन को 19वीं शताब्दी में ही खत्म कर दिया गया था।
वीरापांडियन ने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए था, वह भी तब जब राजपथ पर देश के गौरव यानी परेड को पूरी दुनिया देख रही थी। असंगठित मजदूर संघ की सलाहकार आर गीता ने भी कहा कि बिना ब्लाउज के महिलाओं को दिखाने से बचा जा सकता था।