हमारा देश भारत रहस्यों से भरा हुआ है। यहां कदम-कदम पर ऐसी जानकारियां मिलती हैं, जिन्हें जानकर यकीन करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। इसके साथ ही हमारे देश में ऐसे कई मंदिर हैं, जो काफी रहस्यमय हैं। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से एक अद्भुत शक्ति वाले मंदिर के बारे में बताएंगे, जो बड़े से बड़े जहाज को भी अपनी तरफ खींच लेती थी। तो आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में...
2 of 7
कोणार्क सूर्य मंदिर
- फोटो : Facebook/India in Ireland (Embassy of India, Dublin)
दरअसल, हम बात कर रहे हैं कोणार्क के सूर्य मंदिर की। यह भारत के चुनिंदा सूर्य मंदिरों में से एक है, जो उड़ीसा में जगन्नाथ पुरी से 35 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में कोणार्क शहर में स्थित है। कोणार्क मंदिर पनी पौराणिकता और आस्था के लिए विश्व भर में मशहूर है। इसके साथ ही और भी कई कारण हैं, जिसकी वजह से इस मंदिर को देखने के लिए दुनिया के कोने कोने से लोग यहां आते हैं।
3 of 7
कोणार्क सूर्य मंदिर
- फोटो : Facebook/Beauty Of India
ओडिशा की मध्यकालीन वास्तुकला का अनोखा नमूना है और इसी वजह से साल 1984 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है। कोर्णाक मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किए गए सूर्य भगवान के साक्षात दर्शन करने का सौभाग्य कम ही लोग को मिल पाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर में 52 टन का विशालकाय चुंबक लगा हुआ था।
4 of 7
कोणार्क सूर्य मंदिर
- फोटो : Facebook/भारतीय वास्तुकला (Wonderful Indian Architecture)
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, कोणार्क मंदिर के शिखर पर 52 टन का चुंबकीय पत्थर लगा हुआ था। यह पत्थर समुद्र की कठिनाइओं को कम करता था, जिसकी बदौलत समुद्र के किनारे यह मंदिर सैकड़ों दशकों से खड़ा हुआ है। एक समय ऐसा भी था जब मंदिर का मुख्य चुंबक अन्य चुंबकों के साथ इस तरह की व्यवस्था से सजाया हुआ था कि मंदिर की मूर्ति हवा में तैरती हुई नजर आती थी।
5 of 7
कोणार्क सूर्य मंदिर
- फोटो : सोशल मीडिया
हालांकि, मंदिर की ये ताकतवर चुंबकीय व्यवस्था आधुनिक काल की शुरुआत में समस्या बनने लगी। चुंबकीय शक्ति इतनी तेज थी कि पानी के जहाज मंदिर की तरफ खींचे चले आते थे। अंग्रेजों के काल में जब उन्हें नुकसान होने लगा, तो उन्होंने मंदिर के अंदर लगे इस चुंबक को निकाल दिया। लेकिन इससे जो हुआ, उसका किसी को अनुमान नहीं था।