Moon: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (isro) ने चंद्रयान मिशन-3 ने 14 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से लाॅन्च किया था। 40 दिनों की लंबी यात्रा के बाद चंद्रयान-3 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने की कोशिश करेगा। चंद्रयान-3 की लैंडिंग पर भारत के साथ ही दुनियाभर की नजर टिकी हुई है। इससे पहले चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर ने चांद की कुछ दिलचस्प तस्वीरों को भेजा है। इसरो ने ट्विटर पर इन तस्वीर को शेयर किया है। लैंडर में लगा कैमरा लैंडिंग के दौरान बोल्डर और गहरी खाइयों के बारे में जानकारी देता रहता है। अब इस बीच चीन के रोवर ने ऐसी खोज की है जिससे दुनिया हैरान है।
Moon: चीन के रोवर ने चांद पर खोज निकाली ऐसी चीज, हैरत में पड़ी दुनिया
चीन ने चांग ई-4 की खोज से वैज्ञानिक चांद की ऊपरी सतह के 1000 फीट को कहीं अधिक सूक्ष्मता के साथ देख सकते हैं। जर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च प्लैनेट्स में इस शोध का परिणाम प्रकाशित किया गया था। इस शोध से अरबों सालों के छिपे चंद्रमा का इतिहास दिखाई देता है।
चीन ने चांग ई-4 के साथ युतु-2 नाम का एक रोवर भी चंद्रमा पर भेजा था। इस रोवर में लूनर पेनेट्रेटिंग रडार (LPR) नाम की टेक्नोलॉजी लगी है। एरिजोना के टक्सन में प्लैनेटरी साइंस इंस्टीट्यूट के खगोलीय शोधकर्ता और इस शोध को लिखने वाले जियानकिंग फेंग का कहना है कि यह उपकरण रोवर को चांद की सतह में गहराई तक रेडियो सिग्नल भेजने में सक्षम बनाता है। इसके बाद यह टकराता है और आने वाले सिग्नल को सुनता है। वैज्ञानिक की तरफ से चंद्रमा की उपसतह का नक्शा बनाने के लिए लौटकर आने वाली इन तरंगों का इस्तेमाल करते हैं।
सतह की गहराई में क्या मिला
वैज्ञानिकों ने साल 2020 में युतु-2 के एलपीआर का इस्तेमाल कर चंद्रमा की सतह के ऊपरी 40 मीटर को मैप किया था, लेकिन अभी तक यह और गहराई में नहीं पहुंच पाया था। फेंग ने बताया कि अभी तक के आंकड़ों से पता चलता है कि चांद की सतह से 130 फीट की गहराई तक के हिस्से का धूल, मिट्टी और टूटी चट्टानों की कई परतों से निर्माण हुआ है। एक क्रेटर यानी गड्ढे के अंदर यह सभी चीजें मिली हैं जिसका निर्माण एक टक्कर के बाद हुआ होगा।
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फेंग और उनके साथियों का मानना है कि टक्कर की वजह से संरचना के आसपास का मलबा बाहर आया है। वैज्ञानिकों ने इसके नीचे चांद के लावा की पांच अलग-अलग परतों को खोजा है।
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