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मंगल ग्रह का 4.1 अरब साल पुराना रहस्य खुला! उल्कापिंड में मिला पानी का ऐसा सबूत, जिसने वैज्ञानिकों को चौंकाया

Sat, 31 Oct 2026 03:23 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: धर्मेंद्र कुमार सिंह Updated Sat, 31 Oct 2026 03:23 PM IST
सार

सहारा रेगिस्तान में मिला उल्कापिंड करीब 4.1 अरब साल पुराना है। वैज्ञानिकों को इस खोज से मंगल पर प्राचीन जीवन के अनुकूल परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है। 

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Martian meteorite found in the Sahara is 4.1 billion years old
मंगल ग्रह का 4.1 अरब साल पुराना रहस्य खुला! उल्कापिंड में मिला पानी का ऐसा सबूत - फोटो : AI

सहारा रेगिस्तान में मंगल ग्रह का एक दुर्लभ उल्कापिंड मिला है। यह वैज्ञानिकों के लिए बड़ी खोज साबित हुआ है। करीब 4.1 अरब साल या उससे भी पुरानी इस चट्टान में ऐसे खनिज पाए गए हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि शुरुआती मंगल ग्रह की सतह के नीचे कभी पानी मौजूद था। यह खोज मंगल पर प्राचीन जीवन के अनुकूल परिस्थितियों को समझने में मदद कर सकती है।



वैज्ञानिकों ने तेगाजा 001 (Téguéza 001) नाम के इस उल्कापिंड की उम्र कम से कम 4.1 अरब साल आंकी है। वैज्ञानिकों ने 2022 में अफ्रीकी देश माली के सहारा क्षेत्र में आठ टुकड़ों में उल्कापिंड की खोज की थी। यह स्थान बीर चाली गांव से करीब 34 किलोमीटर दूर मौजूद है। इसका सबसे बड़ा टुकड़ा करीब इंसान की मुट्ठी के आकार का है। प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल साइंस में इस शोध के नतीजे पकाशित हुए हैं। 

मंगल ग्रह पर अरबों साल पहले था पानी

शोधकर्ताओं का कहना है कि तेगाजा 001 एक प्रकार की आग्नेय चट्टान है। ऐसी चट्टानों को निर्माण तब होता है, जब पिघला हुआ पदार्थ किसी ग्रह की सतह के नीचे धीरे-धीरे ठंडा होकर ठोस रूप लेता है। वैज्ञानिकों ने इस चट्टान के खनिजों में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के अलग-अलग समस्थानिक (आइसोटोप) पाया है। इनके विश्लेषण से पता चला कि चट्टान के निर्माण के दौरान पानी के साथ उसकी रासायनिक प्रतिक्रिया हुई थी। इससे यह संकेत मिलता है कि 4.1 अरब साल से भी पहले मंगल की बाहरी चट्टानी परत से पानी नीचे की तरफ पहुंच रहा था और ग्रह के अंदर मौजूद गर्म चट्टानी पदार्थ के संपर्क में आ रहा था।

अमेरिका अंतरिक्ष एजेंसी नासा के ग्रह वैज्ञानिक यांग लियू ने इस अध्ययन का नेतृत्व किया है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने बताया कि उल्कापिंड शुरुआती मंगल के इतिहास की एक झलक देता है। उस समय मंगल ग्रह अपने बाद के इतिहास की तुलना में संभवतः अधिक गर्म और नम था।
 

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Martian meteorite found in the Sahara is 4.1 billion years old
मंगल ग्रह का 4.1 अरब साल पुराना रहस्य खुला! उल्कापिंड में मिला पानी का ऐसा सबूत - फोटो : NASA

कैसे पता चली चट्टान की उम्र?

वैज्ञानिकों ने उल्कापिंड में मौजूद छोटे-छोटे जिरकॉन (Zircon) क्रिस्टल का शोध किया किया और इसकी उम्र का अनुमान लगाया। जिरकॉन में यूरेनियम मिला है, जो रेडियोधर्मी प्रक्रिया के जरिए बेहद धीमी गति से लेड में बदलता है। यूरेनियम और लेड के अनुपात का विश्लेषण करके यह पता लगाया जा सकता है कि खनिज का निर्माण कितने समय पहले हुआ था। इसी तकनीक की मदद से शोधकर्ताओं ने इस चट्टान की उम्र कम से कम 4.1 अरब साल निर्धारित की।
 

Martian meteorite found in the Sahara is 4.1 billion years old
मंगल ग्रह का 4.1 अरब साल पुराना रहस्य खुला! उल्कापिंड में मिला पानी का ऐसा सबूत - फोटो : Freepik

क्या मंगल ग्रह पर कभी था जीवन?

मंगल ग्रह पर प्राचीन पानी की मौजूदगी के संकेत जीवन की संभावना से जुड़े शोध के लिए महत्वपूर्ण हैं। पृथ्वी पर जीवन के लिए पानी आवश्यक है और वैज्ञानिकों का मानना है कि किसी ग्रह पर तरल पानी की मौजूदगी जीवन के अनुकूल परिस्थितियां बनाने में मदद कर सकती है। हालांकि, इस उल्कापिंड की खोज से यह साबित नहीं होता है कि मंगल ग्रह पर कभी जीवन मौजूद था।

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Martian meteorite found in the Sahara is 4.1 billion years old
मंगल ग्रह का 4.1 अरब साल पुराना रहस्य खुला! उल्कापिंड में मिला पानी का ऐसा सबूत - फोटो : Freepik

अध्ययन के सह-लेखक ली सेपर के मुताबिक, शोध के नतीजे से इस विचार को मजबूती मिलती है शुरुआती मंगल पर जीवन के लिए जरूरी कुछ परिस्थितियां मौजूद थीं। लेकिन इससे वहां जीवन होने की पुष्टि नहीं होती। वर्तमान में मंगल ग्रह बेहद ठंडा और शुष्क है। इसकी सतह पर जीवन के लिए परिस्थितियां अनुकूल नहीं दिखाई देतीं। हालांकि, मंगल की सतह पर मौजूद प्राचीन नदी घाटियों, झीलों और अन्य भूगर्भीय संरचनाओं के संकेत से पता चलता है कि अरबों साल पहले वहां पानी बहता था। वैज्ञानिकों ने यह संभावना भी जताई है कि मंगल के उत्तरी गोलार्ध में कभी विशाल महासागर रहा होगा।

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मंगल ग्रह का 4.1 अरब साल पुराना रहस्य खुला! उल्कापिंड में मिला पानी का ऐसा सबूत - फोटो : Freepik

मंगल के शुरुआती इतिहास को समझने में क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज?

पृथ्वी पर अब तक मंगल ग्रह से आए करीब 435 उल्कापिंडों की पहचान की जा चुकी है। इनमें से सिर्फ तीन को ग्रह के शुरुआती इतिहास से जुड़ा माना गया है। तेगाजा 001 अपनी अनुमानित उम्र की वजह से इन दुर्लभ नमूनों में सबसे पुराना हो सकता है। इससे वैज्ञानिकों को मंगल के शुरुआती भूगर्भीय इतिहास और वहां पानी की मौजूदगी को समझने का अहम मौका मिलेगा।

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह चट्टान किसी बड़े उल्कापिंड के मंगल से टकराने के बाद अंतरिक्ष में उछली होगी। इसके बाद यह अंतरिक्ष में यात्रा करते हुए पृथ्वी के वायुमंडल में दाखिल हुई और अंततः सहारा रेगिस्तान में आ गिरी। हालांकि, यह पृथ्वी पर ठीक कब पहुंची, इसकी जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।

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