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सौरमंडल में नए ग्रह की एंट्री? सूर्य के चक्कर लगाती मिली रहस्यमयी चीज, वैज्ञानिकों के दावे ने किया हैरान

Sat, 31 Oct 2026 07:26 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: धर्मेंद्र कुमार सिंह Updated Sat, 31 Oct 2026 07:26 PM IST
सार

वैज्ञानिकों ने NSF-DOE वेरा सी के आंकड़ों की मदद से एक नए पिंड की खोज की है। यह पिंड सौरमंडल में एक नया बौना ग्रह हो सकता है। आइए जानते हैं कि इसको लेकर वैज्ञानिकों ने क्या कहा है? 

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Astronomers Spotted Seems To Be Dwarf Planet Circling Sun Beyond Neptune
सौरमंडल में नए ग्रह की एंट्री? सूर्य के चक्कर लगाती मिली रहस्यमयी चीज - फोटो : AI

विस्तार

वैज्ञानिकों ने सौरमंडल के बाहरी हिस्से में विशाल बर्फीला पिंड खोजा है। यह भविष्य में छठा मान्यता प्राप्त बौना ग्रह बन सकता है। इस पिंड का नाम 2026 ED138 है, जो  सूर्य से करीब 46 खगोलीय इकाई (AU) की दूरी पर स्थित है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, इसका व्यास 600 से 1,500 किलोमीटर के बीच हो सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक आकार और बौना ग्रह होने की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

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अमेरिका की NSF-DOE वेरा सी के आंकड़ों की मदद से इस ग्रह की खोज की गई है। अगर आगे के अध्ययन में इसकी बौना ग्रह के रूप में पुष्टि होती है, तो यह अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) द्वारा मान्यता प्राप्त छठा बौना ग्रह होगा।
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कैसे मैथ्यू होलमैन ने खोजा यह पिंड?

सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स (CfA) के खगोलशास्त्री मैथ्यू होलमैन ने 2026 ED138 की खोज की है। 13 अक्तूबर 2026 को उन्होंने रुबिन ऑब्जर्वेटरी के शुरुआती आंकड़ों की एक विशेष सर्च कोड के जरिए जांच की। यह कोड उन्होंने अपने सहयोगी केविन नेपियर के साथ मिलकर तैयार किया था। यह सॉफ्टवेयर अरबों खगोलीय संकेतों का विश्लेषण करके उन संकेतों को आपस में जोड़ता है, जो अंतरिक्ष में एक ही गतिशील पिंड से संबंधित होते हैं।
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होलमैन ने जब इस पिंड की खोज की, तो उसकी चमक और सूर्य से दूरी ने उनका ध्यान खींचा। उन्हें शुरुआत में यकीन नहीं हुआ कि इतनी बड़ी वस्तु अब तक वैज्ञानिकों की नजरों से कैसे बची रही। फिर उन्होंने खोज की पुष्टि के लिए अतिरिक्त आंकड़ों की जांच की। रुबिन ऑब्जर्वेटरी के वैज्ञानिक मारियो जुरिक ने भी इसके पुराने रिकॉर्ड की जांच की और मार्च 2026 से संबंधित 20 अतिरिक्त अवलोकन खोजे। 

कुल मिलाकर रुबिन टेलीस्कोप ने 4 मार्च से 11 जुलाई 2026 के बीच 20 अलग-अलग रातों में इस पिंड को 30 बार रिकॉर्ड किया था। इसके साथ ही पुरानी DECam तस्वीरों से भी इसके अवलोकन मिले, जिनकी मदद से वैज्ञानिक इसकी कक्षा का रिकॉर्ड 2016 तक पीछे ले जा सके।

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क्यों माना जा रहा है 2026 ED138 को बौना ग्रह?

वैज्ञानिकों का कहना है कि किसी खगोलीय पिंड को बौना ग्रह मानने के लिए कुछ खास शर्तें होती हैं। उसे सूर्य की परिक्रमा करनी चाहिए, उसका अपना गुरुत्वाकर्षण उसे लगभग गोल आकार देने के लिए पर्याप्त होना चाहिए। साथ ही उसने अपनी कक्षा के आसपास के दूसरे पिंडों को हटाकर उस क्षेत्र पर अपना प्रभुत्व स्थापित नहीं किया होना चाहिए और वह किसी दूसरे ग्रह का उपग्रह नहीं होना चाहिए।

2026 ED138 का अनुमानित आकार इतना बड़ा है कि वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इसका गुरुत्वाकर्षण इसे लगभग गोल आकार दे सकता है। हालांकि, सिर्फ आकार के अनुमान के आधार पर इसे बौना ग्रह घोषित नहीं किया जा सकता। इसका सटीक व्यास जानने के लिए वैज्ञानिकों को इसकी सतह से परावर्तित प्रकाश और अन्य भौतिक गुणों का अध्ययन करना होगा। इसके लिए इन्फ्रारेड यानी अवरक्त तरंगदैर्ध्य में अतिरिक्त अवलोकन महत्वपूर्ण होंगे।

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सूर्य से कितना दूर है यह पिंड? 

फिलहाल 2026 ED138 सूर्य से करीब 46 AU की दूरी पर है। एक खगोलीय इकाई (AU) पृथ्वी और सूर्य के बीच की औसत दूरी के बराबर होती है, जो करीब 15 करोड़ किलोमीटर है। तुलना करते हैं, तो प्लूटो सूर्य से औसतन करीब 39.5 AU दूर रहता है। इस लिहाज से 2026 ED138 वर्तमान में प्लूटो की औसत सूर्य-दूरी से भी आगे स्थित है। इसकी कक्षा सौरमंडल के मुख्य तल से करीब 24 डिग्री झुकी है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, नेपच्यून के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव ने अतीत में इसकी कक्षा को प्रभावित किया हो सकता है।

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क्यों खास है वेरा रुबिन ऑब्जर्वेटरी?

चिली के सेरो पचोन पर्वत पर स्थित वेरा सी. रुबिन ऑब्जर्वेटरी आधुनिक खगोल विज्ञान की सबसे अहम वेधशालाओं में से एक है। इसका सिमोनी सर्वे टेलीस्कोप 8.4 मीटर के मुख्य दर्पण और 3.2 गीगापिक्सल के विशाल कैमरे से लैस है। इसका प्रमुख प्रोजेक्ट लिगेसी सर्वे ऑफ स्पेस एंड टाइम (LSST) जून 2026 में शुरू हुआ। इसके तहत टेलीस्कोप अगले 10 वर्षों तक दक्षिणी आकाश का बार-बार सर्वे करेगा और हर कुछ रातों में पूरे दक्षिणी आकाश की तस्वीरें लेगा। इससे वैज्ञानिकों को ऐसे छोटे और दूरस्थ खगोलीय पिंडों का पता लगाने में मदद मिलेगी, जो पहले भीड़भाड़ वाले तारकीय क्षेत्रों में छिपे रह जाते थे। कई लोगों में सवाल है कि क्या इस एलियम रहते हैं? तो जवाब है कि वैज्ञानिकों ने यहां पर जीवन होने की संभावना की कोई बात नहीं कही है। 

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अभी सौरमंडल में कितने बौने ग्रह हैं?

अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) ने अभी तक पांच बौने ग्रहों को मान्यता दी है। इनमें प्लूटो, सेरेस, एरिस, हौमेया और माकेमाके शामिल हैं। बता दें कि 2006 में प्लूटो को ग्रह की श्रेणी से हटाकर बौने ग्रह की श्रेणी में रखा गया था। इसके बाद सौरमंडल में मान्यता प्राप्त ग्रहों की संख्या आठ रह गई थी। 2026 ED138 की खोज ने बौने ग्रहों की सूची में एक और नाम जुड़ने की संभावना बढ़ा दी है। हालांकि, इसकी पुष्टि के लिए आगे के वैज्ञानिक अध्ययन और विस्तृत अवलोकनों का इंतजार करना होगा।

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