बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत के बाद चल रही हाई प्रोफाइल जांच में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। इस जांच में बॉलीवुड के ड्रग्स कारोबार के साथ तार जुड़े होने का एंगल भी सामने आया है। ऐसे में सीबीआई के साथ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो भी जांच में सक्रिय हो गया है। रिया चक्रवर्ती के बाद दीपिका पादुकोण, सारा अली खान, रकुल प्रीत कौर जैसे कई मशहूर सेलिब्रिटी से ड्रग्स के इस्तेमाल और खरीद फरोख्त को लेकर पूछताछ चल रही है। आज हम आपको बताएंगे कि ड्रग्स का इस्तेमाल करने या उसे रखने के लिए दोषी पाए जाने पर कानूनन क्या सजा हो सकती है?
आखिर ड्रग्स सेवन को लेकर देश में क्या है कानून और क्या हो सकती है सजा?
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एंटी ड्रग्स कानून
भारत में ड्रग्स संबंधी मामलों को लिए नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रापिक सब्सटैंस एक्ट यानी NDPS एक्ट 1985 और NDPS एक्ट 1988 दो मुख्य कानून हैं। इन दोनों कानून के मुताबिक नारकोटिक ड्रग्स या फिर किसी भी नियंत्रित केमिकल या साइकोट्रॉपिक पदार्थ का उत्पादन, पजेशन, बिक्री, खरीदी, व्यापार, आयात-निर्यात और इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध है। केवल मेडिकल या वैज्ञानिक उपयोग के लिए विशेष मंजूरियों के बाद यह संभव हो सकता है।
भारत सरकार द्वारा लगाए गए इस प्रतिबंध को तोड़ने पर व्यक्ति के खिलाफ सर्च, कुर्की और गिरफ्तारी का अधिकार भी NDPS एक्ट देता है। ऐसे मामलों में जांच एजेंसी निजी या सार्वजनिक स्थानों पर कार्रवाई कर सकती है।
ड्रग्स पर देश की नीति
हमारे देश के संविधान में आर्टिकल 47 के तहत भी राज्य को ड्रग्स नियंत्रण, रोकथाम के लिए शक्ति मिली है। वर्तमान कानून के तहत ड्रग्स के नियंत्रण के लिए तीन श्रेणियों में ड्रग्स की चर्चा की गई है। पहली एलएसडी, मेथ जैसे साइकोट्रॉपिक पदार्थों की श्रेणी है। दूसरी चरस, गांजे, अफीम जैसी नारकोटिक ड्रग्स की और तीसरी श्रेणी मिश्रण वाले केमिकल पदार्थों की है, जिसे कंट्रोल्ड सब्सटैंस कहते हैं।
कोकीन, गांजा समेत सवा दो सौ से ज्यादा ऐसे साइकोट्रॉपिक और ड्रग्स की सूची है, जो NDPS एक्ट के तहत प्रतिबंधित हैं। ऐसे में इनमें से किसी भी मिश्रण को अगर आप अपने पास रखते हैं, इस्तेमाल करते हैं या किसी तरह से इसका व्यापार करते हैं, तो आप सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को तोड़ते हैं। ऐसे में आप पर कानूनन सजा हो सकती है। हालांकि, सजा इस बात पर तय होगी कि आपका दोष कैसा और कितना है।
NDPS एक्ट के तहत एक किलो से कम तक ड्रग्स रखने को व्यावसायिक नहीं माना जाता है। निजी इस्तेमाल के लिहाज से ड्रग्स मिलने पर आरोपी को 10 साल तक की कैद, जबकि कमर्शियल मात्रा में ड्रग्स रखने पर 20 साल तक की सख्त कैद का प्रावधान है।