महाग्रंथ महाभारत और उससे जुड़े प्रमुख पात्रों यानी पांचों पांडवों से तो आप बखूबी परिचित होंगे। कहते हैं कि भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव अपने बड़े भाई युधिष्ठिर का बहुत सम्मान करते थे। लेकिन एक बार भीम अपने बड़े भाई युधिष्ठिर पर इतना गुस्सा हो गए थे कि वो उनके दोनों हाथों को जला देना चाहते थे। क्या आप जानते हैं भीम ने ऐसा क्यों किया था? इसके पीछे एक रोचक कहानी प्रचलित है।
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भीम महाभारत (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
मान्यता है कि कि जब युधिष्ठिर जुए में द्रौपदी को हार जाते हैं, तो द्रौपदी को भरी सभा में बुला कर उसका अपमान किया गया। यह देखकर भीम को बहुत गुस्सा आ गया। भीम ने युधिष्ठिर से कहा कि आपने जुए में जो धन हारा है, उससे मुझे क्रोध नहीं हैं, लेकिन द्रौपदी को भी आपने दांव पर लगाया और उसे भी जुए में हार गए, यह बहुत ही गलत है।
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द्रौपदी महाभारत (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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भीम ने युधिष्ठिर से कहा कि द्रौपदी अपमान करने के योग्य नहीं है। लेकिन आपके कारण ये दुष्ट कौरव उसे अपमानित कर रहे हैं और वह भी भरी सभा में। भीम ने कहा कि द्रौपदी की इस दशा का कारण आप हैं, इसलिए मैं आपके उन दोनों हाथों को जला दूंगा, जिनसे आपने द्रौपदी को जुए में हारा है।
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पांडव महाभारत (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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भीम युधिष्ठिर के दोनों हाथों को जलाने के लिए सहदेव से अग्नि लाने को कहते हैं। हालांकि, बाद में अर्जुन उन्हें समझाते हैं और कहते हैं कि युधिष्ठिर ने क्षत्रिय धर्म के अनुसार ही जुआ खेला है। इसमें इनका कोई दोष नहीं हैं।
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पांडव महाभारत (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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अर्जुन की बात सुनकर भीम का गुस्सा शांत हो जाता है और वो कहते हैं कि यह बात मैं भी जानता हूं। अगर नहीं जानता तो मैं बहुत पहले ही बलपूर्वक युधिष्ठिर के दोनों हाथों को जला देता।