{"_id":"6116992fd2e90f4e7d0b3163","slug":"know-about-mysterious-tanginath-dham-where-lord-parshuram-farsa-still-exists","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"अजब-गजब: कहानी भारत के एक ऐसे मंदिर की, जहां आज भी मौजूद है भगवान परशुराम का विशालकाय फरसा","category":{"title":"Bizarre News","title_hn":"हटके खबर","slug":"bizarre-news"}}
अजब-गजब: कहानी भारत के एक ऐसे मंदिर की, जहां आज भी मौजूद है भगवान परशुराम का विशालकाय फरसा
किस्से-कहानियों में अक्सर आपने भगवान परशुराम और उनके फरसे के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या आपको पता है कि वो फरसा आज भी धरती पर मौजूद है। जी हां, दावा किया जाता है कि एक पहाड़ी पर स्थित एक मंदिर में भगवान परशुराम का फरसा गड़ा है, जिसे खुद उन्होंने ही गाड़ा था। इस फरसे से जुड़ी एक बेहद ही रहस्यमय कहानी है, जिसके बारे में बहुत कम ही लोग जानते होंगे। आज हम आपको इसी कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आपको हैरान कर देगी।
दरअसल, झारखंड की राजधानी रांची से करीब 150 किलोमीटर दूर गुमला जिले में एक पहाड़ी है, जहां स्थित है टांगीनाथ धाम। इसी धाम के एक मंदिर में मौजूद है भगवान परशुराम का फरसा। वैसे तो यह फरसा खुले आसमान के नीचे है, लेकिन आज तक इसमें कभी जंग नहीं लगा। यह किसी रहस्य से कम नहीं है कि हजारों साल बाद भी यह पूरी तरह सुरक्षित है।
2 of 5
टांगीनाथ थाम मंदिर
- फोटो : सोशल मीडिया
मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस फरसे से छेड़छाड़ की कोशिश करता है, उसे इसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ता है। कहते हैं कि एक बार लोहार जनजाति के कुछ लोगों ने फरसे को जमीन से उखाड़ कर ले जाने की कोशिश की थी, लेकिन जब फरसा नहीं उखड़ा तो उन्होंने उसके ऊपरी भाग को काट दिया। हालांकि, उसे भी वो ले जाने में नाकाम रहे।
3 of 5
भगवान परशुराम का फरसा
- फोटो : सोशल मीडिया
कहा जाता है कि इस घटना के बाद आसपास रहने वाले लोहार जनजाति के लोगों की एक-एक मौत होने लगी, जिसके बाद वो इलाका ही छोड़कर चले गए। आज भी इस जनजाति के लोग आसपास के गांवों में रहने से घबराते हैं। भगवान परशुराम के टांगीनाथ धाम आने और वहां अपना फरसा जमीन में गाड़ने के पीछे एक दिलचस्प कहानी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 5
भगवान परशुराम का फरसा
- फोटो : सोशल मीडिया
मान्यता है कि त्रेतायुग में जनकपुर में माता सीता के स्वयंवर के दौरान, जब भगवान राम ने शिवजी का धनुष तोड़ा, तो उसकी भयंकर ध्वनि सुनकर परशुराम जी गुस्से में जनकपुर पहुंच गए और उन्होंने भगवान राम और लक्ष्मण को पहचाने बिना ही उन्हें खूब बुरा-भला कहा, लेकिन बाद में जब उन्हें ये अहसास हुआ कि राम जी भगवान विष्णु के अवतार हैं, तो वो बहुत लज्जित हुए और अपने किए का प्रायश्चित करने के लिए घने जंगलों के बीच एक पहाड़ पर चले गए। वहीं पर उन्होंने अपना फरसा गाड़ दिया और तपस्या करने लगे। उसी जगह को आज टांगीनाथ धाम के नाम से जाना जाता है। कहते हैं कि फरसे के अलावा भगवान परशुराम के पदचिह्न भी वहां मौजूद हैं।
विज्ञापन
5 of 5
टांगीनाथ धाम में मौजूद शिवलिंग
- फोटो : सोशल मीडिया
टांगीनाथ धाम में सैकड़ों शिवलिंग और प्राचीन प्रतिमाएं भी हैं और वो भी खुले आसमान के नीचे। बताया जाता है कि साल 1989 में पुरातत्व विभाग ने यहां खुदाई करवाई थी, जिसमें हीरा जड़ित मुकुट और सोने-चांदी के आभूषण समेत कई कीमती वस्तुएं मिली थीं। हालांकि, बाद में अचानक ही खुदाई बंद कर दी गई। अब इसके पीछे क्या वजह थी, यह आज भी एक रहस्य ही है। वहीं खुदाई में मिली चीजें आज भी डुमरी थाना के मालखाने में रखी हुई हैं।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे| Get all Bizarre News in Hindi related to Weird News - Bizarre, Strange Stories, Odd and funny stories in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Bizarre and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।