इराकी तानाशाह सद्दाम हुसैन की क्रूरता के किस्से जगजाहिर है। दो दशक से ज्यादा इराक पर राज करने वाले इस तानाशाह का खौफ इतना बढ़ गया था कि एक समय के लिए अमेरिका भी थर्रा गया था। आपने ये बात तो जरूर सुनी होगी कि किसी भी सिक्के के दो पहलू होते हैं। सद्दाम हुसैन भी इससे अछूते नहीं थे। इस शख्स ने अपनी ऐसी छवि बना ली थी, जिसके वजह से ये कुछ लोगों के लिए मसीहा था, तो वहीं दुनिया की बड़ी आबादी के लिए वह एक बर्बर तानाशाह था।
2 of 7
सद्दाम हुसैन
- फोटो : सोशल मीडिया
बगदाद के उत्तर में स्थित तिकरित के एक गांव में पैदा हुए सद्दाम हुसैन ने नून की पढ़ाई की थी। साल 1957 में उसने बाथ पार्टी की सदस्यता ली, जो अरब राष्ट्रवाद का समाजवादी रूप में अभियान चला रही थी। बता दें कि आगे चलकर साल 1962 में ये अभियान सैन्य विद्रोह का कारण बना। इसी दौरान ब्रिगेडियर अब्दुल करीम कासिम ने सत्ता पर कब्जा कर लिया, जिसमें सद्दाम भी शामिल था।
3 of 7
सद्दाम हुसैन
- फोटो : सोशल मीडिया
साल 1968 में दोबारा विद्रोह हुआ और 31 साल के सद्दाम ने जनरल अहमद हसन अल बक्र के साथ मिलकर सत्ता पर कब्जा किया। इसमें सद्दाम की भूमिका अहम थी। इस तरह से धीरे-धीरे सद्दाम की ताकत बढ़ती गई और 1979 में वह खुद राष्ट्रपति बन गया। राष्ट्रपति बनने के बाद सद्दाम ने सबसे पहले शिया और कुर्द आंदोलनों को दबाया। सद्दाम हुसैन ने अमेरिका का भी विरोध किया।
4 of 7
सद्दाम हुसैन
- फोटो : सोशल मीडिया
तानाशाह सद्दाम हुसैन ने अपनी अपनी हत्या की साजिश रचने वालों से बदला लेने के लिए इराक के दुजैल शहर में साल 1982 में नरसंहार करवाया। इस नरसंहार में 148 शिया लोगों की हत्या हुई थी। इस मामले में 5 नवंबर 2006 को उसे मृत्युदंड सुनाया गया।
5 of 7
सद्दाम हुसैन
- फोटो : सोशल मीडिया
दरअसल, साल 2003 में अमेरिका-ब्रिटेन ने इराक पर जैविक हथियार इकट्ठा करने का आरोप लगाया, जिसका उसने खंडन किया। अमेरिका और ब्रिटेन के नेतृत्व में संयुक्त सेनाओं ने इराक पर हमला किया और अप्रैल-2003 में सद्दाम हुसैन को सत्ता से बेदखल कर दिया। ऐसे में सद्दाम हुसैन को अंडरग्राउंड होना पड़ा। इसके बाद सद्दाम की तलाश में ऑपरेशन रेड डॉन शुरू हुआ और 13 दिसंबर 2003 को तिकरित के नजदीक अदटॉर से सद्दाम को पकड़ा गया।