फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

राधाबिनोद पाल: कहानी एक ऐसे भारतीय जज की, जिसे जापान के लोग मानते हैं भगवान

Tue, 15 Jun 2021 06:44 AM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Tue, 15 Jun 2021 06:44 AM IST
विज्ञापन
Indian judge Radhabinod Pal who remembered in Japan like as god
जस्टिस राधाबिनोद पाल - फोटो : सोशल मीडिया

राधाबिनोद पाल, शायद आपने इस महान शख्स का नाम भी न सुना हो। और भी बहुत सारे भारतीय ऐसे हैं, जो इन्हें न तो जानते हैं और न ही पहचानते हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इस शख्स को जापान में ना सिर्फ लोग जानते हैं, बल्कि उसे भगवान की तरह पूजते भी हैं। इतना ही नहीं आपको ये जानकर हैरानी होगी कि कि जापान के यासुकुनी मंदिर और क्योतो के र्योजेन गोकोकु देवालय में इनकी याद में विशेष स्मारक बनवाए गए हैं।



 

27 जनवरी 1886 को तत्कालीन बंगाल प्रांत में जन्मे राधाबिनोद पाल अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त भारतीय विधिवेत्ता और न्यायाधीश थे। उन्होंने कोलकाता के प्रेसिडेंसी कॉलेज और कोलकाता विश्वविद्यालय से कानून की शिक्षा ली थी और उसके बाद 1923 से 1936 तक वो इसी विश्वविद्यालय में अध्यापक भी रहे थे। साल 1941 में उन्हें कोलकाता उच्च न्यायालय में न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। इसके अलावा वह अंग्रेजों के सलाहकार भी रहे थे।

Indian judge Radhabinod Pal who remembered in Japan like as god
राधाबिनोद पाल - फोटो : सोशल मीडिया

राधाबिनोद पाल द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जापान द्वारा किए गए युद्ध अपराधों के खिलाफ चलाए गए अंतरराष्ट्रीय मुकदमे 'टोक्यो ट्रायल्स' में भारतीय जज थे। उन्हें ब्रिटिश सरकार ने भारत का प्रतिनिधि बनाया था।

Indian judge Radhabinod Pal who remembered in Japan like as god
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

कुल 11 जजों में वो इकलौते ऐसे जज थे, जिन्होंने ये फैसला किया था कि सभी युद्ध अपराधी निर्दोष हैं। इन युद्धबंदियों में जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री हिदेकी तोजो सहित 20 से ज्यादा अन्य नेता और सैन्य अधिकारी शामिल थे।

विज्ञापन
विज्ञापन
Indian judge Radhabinod Pal who remembered in Japan like as god
जस्टिस राधाबिनोद पाल - फोटो : सोशल मीडिया

न्यायाधीश पाल ने अपने फैसले में लिखा था कि किसी घटना के घटित होने के बाद उसके बारे में कानून बनाना उचित नहीं है और इसीलिए उन्होंने युद्धबंदियों पर मुकदमा चलाने को विश्वयुद्ध के विजेता देशों की जबरदस्ती बताते हुए सभी को छोड़ने का फैसला सुनाया था। हालांकि, अन्य जजों ने उन्हें मृत्युदंड दिया था। यही वजह है कि जापान में उन्हें आज भी एक महान व्यक्ति की तरह सम्मान दिया जाता है।

विज्ञापन
Indian judge Radhabinod Pal who remembered in Japan like as god
जापान में जस्टिस राधाबिनोद पाल का स्मारक - फोटो : सोशल मीडिया

साल 2007 में जब जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे भारत आए थे, तो उन्होंने राधाबिनोद पाल के बेटे से कोलकाता में मुलाकात की थी और तस्वीरों का आदान-प्रदान भी किया था। दरअसल, उस समय के युद्ध अपराधियों में शिंजो आबे  के नाना नोबूसुके किशी भी शामिल थे, जो बाद में प्रधानमंत्री बने।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Bizarre News in Hindi related to Weird News - Bizarre, Strange Stories, Odd and funny stories in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Bizarre and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed