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ज्ञान की बात: राजनीतिक आंदोलन से शुरू हुआ तालिबान, जिसके जन्म की कहानी खुद अमेरिका ने लिखी

Tue, 20 Jul 2021 09:16 AM IST
संकल्प सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संकल्प सिंह Updated Tue, 20 Jul 2021 09:16 AM IST
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History of Taliban whose birth story was written by the America
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

अफगानिस्तान से अमेरिका की सेना धीरे-धीरे वापस जा रही है। इस कारण तालिबान की गूंज फिर से सुनाई देने लगी है। तालिबान फिर से अपना दायरा फैलाने में लग गया है। ऐसे में ये जानना बहुत जरूरी हो गया है कि तालिबान है क्या? इसका जन्म कैसे हुआ था और आने वाले समय में इस घटनाक्रम का भारत पर क्या असर पड़ने वाला है?



माना ये जा रहा है कि सितंबर तक अमेरिका अपनी पूरी सेना वापस बुला लेगा। ऐसे में तालिबान का वर्चस्व फिर से अफगानिस्तान में बढ़ सकता है। आशंका ये भी जताई जा रही है कि 22-24 साल पहले जो हालात थे, वह दोबारा जिंदा हो सकते हैं। इससे वैश्विक राजनीति पर बड़ा प्रभाव पड़ने वाला है। इस घटना की वजह से मध्य एशिया में हलचल देखने को मिलेगी। इसके अलावा हमारे भारत देश को भी करोड़ों रुपयों का घाटा सहन करना पड़ सकता है। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से तालिबान के पूरे इतिहास के बारे में बताएंगे।

History of Taliban whose birth story was written by the America
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

तालिबान का जन्म
1950 से 1990 के दशक के दौरान अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध चल रहा था। दोनों ही देश वैचारिक और भौगोलिक स्तर पर अपना विस्तार करने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगा रहे थे। इसी कड़ी में 1979 में सोवियत संघ ने अफगानिस्तान पर हमला कर दिया। अफगानिस्तान में सोवियत का प्रभुत्व, अमेरिका से बर्दाश्त नहीं हुआ। इसे देखते हुए उसने ओसामा बिन लादेन का सहारा लिया और उसे अफगानिस्तान में भेजा, जहां उसने स्थानीय लोगों को सोवियत संघ के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार किया।

History of Taliban whose birth story was written by the America
तालिबान - फोटो : पीटीआई

इसी दौरान अफगान मुजाहिदीन का गठन हुआ, जिसका एकमात्र लक्ष्य सोवियत सेना को अपने देश से बाहर खदेड़ना था। अमेरिका और पाकिस्तान भारी मात्रा में महंगे से महंगे सैन्य उपकरण और आर्थिक सहयोग इन मुजाहिदीनों को पहुंचा रहे थे, जिसके बल पर अफगान मुजाहिदीन सोवियत सेना से लड़ रही थी। इस युद्ध में मुजाहिदीनों ने सोवियत सेना को भारी क्षति पहुंचाई। 10 साल के अंदर की इस लड़ाई में सोवियत सेना ने अपने 15,000 सैनिकों को खो दिया। इस कारण सोवियत संघ को मजबूरन अफगानिस्तान को छोड़ना पड़ा। 

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History of Taliban whose birth story was written by the America
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

इसके बाद अहमद शाह मसूद के नेतृत्व में अफगान मुजाहिदीन ने अफगानिस्तान की राजधानी को घेर लिया। सैयद मोहम्मद नजीबुल्लाह के नेतृत्व में अफगानिस्तान में सरकार की स्थापना हुई। हालांकि इस दौरान देश में अस्थिरता का माहौल बना रहा। 1994 में अफगान मुजाहिदीन का ही एक अंग तालिबान देश में उभरा, जिसकी स्थापना मुल्ला मोहम्मद उमर ने की।

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ओसामा बिन लादेन - फोटो : Social media

1994 में अफगानिस्तान के भीतर तालिबान एक शक्तिशाली आंदोलन बन गया था। इस दौरान पाकिस्तान ने तालिबान से जुड़े लोगों को भारी मात्रा में आर्थिक सहायता, सैन्य सहायता और हथियार मुहैया कराया, ताकि तालिबान के जरिए सेंट्रल एशिया से पाकिस्तान का व्यापार मार्ग खुलवाया जा सके। पाकिस्तान की इस सहायता के चलते तालिबान काफी मजबूत हो गया और देखते ही देखते उसने 1996 में राजधानी काबुल को अपने कब्जे में ले लिया। धीरे-धीरे उसने बाकी हिस्सों को भी अपने गिरफ्त में लेने की शुरुआत की। इस बीच अफगानिस्तान की सरकार और तालिबान के बीच कई सारे युद्ध हुए। इस दौरान पाकिस्तान ने तालिबान के साथ विभिन्न स्तरों पर अपने रिश्ते मजबूत कर लिए थे। उसने कई तालिबानी नेताओं को अपने यहां पर ट्रेनिंग दी। इसी बीच 1996 के आसपास ओसामा बिन लादेन दोबारा अफगानिस्तान में आता है, जहां उसका तालिबान के नेताओं ने पुरजोर ढंग से स्वागत किया। ओसामा बिन लादेन के मंसूबे कुछ और थे, जिसे पूरा करने के लिए उसने तालिबान के भीतर आतंकवादियों को भर्ती करने की शुरुआत की। इसे देखते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ ने ओसामा बिन लादेन को पकड़ने के लिए प्रस्ताव पारित किया, जिसका कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकला।

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