Great Smog of London: इन दिनों दिल्ली-एनसीआर के आसमान पर धुंध छाई हुई है, जिसमें लोगों का सांस लेना भी भारी हो रहा है। 500 AQI को पार करते हुए दिल्ली-NCR की हवा 25-30 सिगरेट के धुएं जितनी जहरीली हो गई है। ऐसे में कई लोग हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने की मांग भी कर रहे हैं। प्रदूषण की इस मोटी चादर को छाए आज छठा दिन है, जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कुछ इस तरह का स्मॉग करीब 70 साल पहले लंदन में भी गहराया था, जिसे लोगों ने पहले तो हल्के में लिये लेकिन ये उनकी भूल थी। उस स्मॉग ने इतनी खतरनाक रूप लिया कि दिन में अचानक अंधेरा छा गया, हजारों लोगों की मौत हो गई, अस्पतालों में जगह नहीं थी, चारों ओर बेहद भयावह मंजर था। साल 1952 में ब्रिटेन की राजधानी लंदन में दिसंबर के शुरुआती दिनों में एक भयावह अंधेरा छाया था। 70 साल पहले लंदन का आसमान पूरी तरह काला हो गया था। वहां कि हवा इतनी काली और दमघोंटू हो गई कि धरती पर सूरज की रोशनी तक नहीं पहुंच रही थी। इतना ही नहीं इस हवा ने एक ही दिन में हजारों लोगों की जान ले ली।
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Great Smog of London 1952
- फोटो : अमर उजाला
इस भयावह मंजर को याद कर आज भी इंग्लैंड के साथ पूरी दुनिया डर जाती है। इसे "ग्रेट स्मॉग ऑफ लंदन" नाम से जाना जाता है। लंदन की सड़कों पर छाई इस कालिमा ने देखते ही देखते चार दिनों में 4000 लोगों की मौत के घाट उतार दिया। हालांकि इस स्मॉग के दौरान कुल 12,000 लोगों की जानें गईं।
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Great Smog of London 1952
- फोटो : Istock
इतिहास में इससे बड़ा वायु प्रदूषण पहले कभी नहीं देखा गया था। दिसंबर की शुरुआत में स्मॉग के अंधेरे के साथ ठंड भी चरम पर थी। हवाएं न चलने की वजह से प्रदूषण को पैर पसारने का पूरा मौका मिला। दरअसल इस स्मॉग का मुख्य कारण कोयला था, जिससे पूरे शहर पर एक काली चादर बिछ गई थी।
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Great Smog of London 1952
- फोटो : Istock
ये स्मॉग 05 दिसंबर से 09 दिसंबर 1952 तक बना रहा, जो मौसम में बदलने पर ही छटा। ये स्मॉग सड़कों पर ही नहीं बल्कि घरों और बंद जगहों में भी घुस आया था। हालांकि लंदन पहले भी स्मॉग देखता आया था लेकिन ये बेहद भयानक था। इस स्मॉग को पी-सूपर्स (मटर के सूप जैसा घना) भी नाम दिया। इस दौरान लोगों का स्नायु तंत्र पर बेहद बुरा प्रभाव पड़ा। आंखों में जलन की समस्या शुरू हो गई। रिपोर्ट्स बताते हैं कि इससे 6000 से अधिक लोग मारे गए और एक लाख से अधिक लोग स्मॉग की वजह से बीमारियों का शिकार हो गए थे।
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Great Smog of London 1952
- फोटो : सोशल मीडिया
इस घटना के बाद से दुनियाभर में स्वास्थ्य पर इसका असर, पर्यावरण पर रिसर्च, पर्यावरण संबंधी कानून से लेकर हवा की शुद्धता को लेकर जागरूकता के मुद्दे पर बात शुरू हुई। इसके बाद में साल 1956 में पहली बार ब्रिटेन में क्लीन एयर एक्ट लागू हुआ।