वैसे तो अधिकतर लोगों के साथ ऑफिस में छुट्टियों का पंगा हमेशा ही बना रहता है। लेकिन अगर आपको पता चले कि एक शख्स ने अपनी पूरी नौकरी के दौरान एक भी छुट्टी नहीं ली है और उसे अब रिटायरमेंट के समय 19 करोड़ रुपये भी मिले हैं तो यकीनन आप चौंक जाएंगे।
यह सुनकर भले ही आपको एक बार यकीन न हो लेकिन ये खबर पूरी तरह सच है। दुनियाभर में भारतीयों की काम के प्रति लगन और कार्यशैली की तारीफ हमेशा से की जाती है। अधिकतर भारतीय कर्मचारी अपनी सिक लीव (बीमारी में जी जाने वाली छुट्टियां) का इस्तेमाल नहीं करते और साल के अंत में इन्हें भुना (पैसे लेना) लेते हैं।
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Anil Manibhai Naik
- फोटो : Social Media
लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) के नॉन एक्जीक्यूटिव चेयरमैन अनिल मणिभाई नायक 54 साल तक काम करने के बाद पिछले महीने रिटायर हो गए। इन सालों में उन्होंने लगातार काम किया। इस दौरान उन्होंने जो छुट्टियां नहीं लीं, उसके लिए 19.4 करोड़ रुपए (लीव एनकैशमेंट) अलग से दिए गए।
नायक को पद्म विभूषण के लिए चुना गया
एलएंडटी की मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक रिटायरमेंट पर नायक को 137 करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान हुआ। इसमें उनकी आखिरी महीने की बेसिक सैलरी 2.7 करोड़ रुपए के अलावा ग्रेच्युटी और अन्य लाभ के करीब 100 करोड़ रुपए शामिल हैं। दक्षिण गुजरात के गांव के प्राइमरी स्कूल टीचर के बेटे नायक को इस साल गणतंत्र दिवस पर दूसरे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण के लिए भी चुना गया था।
अनिल मणिभाई नायक ने लार्सन एंड टब्रो को 1965 में बतौर जूनियर इंजीनियर ज्वाइन किया था। नायक ने 80 के दशक में एलएंडटी को बचाने के लिए अकेले अंबानी फैमिली और आदित्य बिड़ला ग्रुप से लड़ाई लड़ी। इतना ही नहीं उन्होंने इन दोनों कॉरपोरेट ग्रुप के हाथों कंपनी को बिकने से बचाने में भी कामयाबी हासिल की थी। उन्होंने कर्मचारियों को समझाया था कि हम सब इसके मालिक रहेंगे तो कोई भी बाहरी व्यक्ति दोबारा कंपनी को खरीदने की कोशिश नहीं करेगा। 2003 में जब नायक सीईओ बने तब कंपनी की मार्केट वैल्यू लगभग 6 हजार करोड़ रुपए थी। उनकी देखरेख में कंपनी का मार्केट कैप 31 गुना तक बढ़ गया। इस समय कंपनी का मार्केट कैप 1.82 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है।