Facts of Prithviraj Chauhan: बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार की मोस्ट अवेटेड फिल्म 'पृथ्वीराज' इस शुक्रवार को रिलीज होने जा रही है। इस फिल्म में सम्राट पृथ्वीराज चौहान की यशगाथा को दिखाने की कोशिश की गई है। हम आपको फिल्म आने से पहले सम्राट पृथ्वीराज चौहान की वीरता कहानियों बारे में बताने जा रहे हैं। आपको जानकर हैरानी होगी आंख नहीं होने के बाद भी सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने मुहम्मद गौरी को मार गिराया था।
Prithviraj Chauhan: जानिए मुहम्मद गौरी को 17 बार हराने वाले सम्राट पृथ्वीराज चौहान की वीरता की अद्भुत कहानी
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दिल्ली राज सिंहासन की गद्दी संभालने के बाद पृथ्वीराज चौहान ने किला राय पिथौरा को बनवाया था। उन्होंने सिर्फ 13 साल की उम्र में ही गुजरात के पराक्रमी शासक भीमदेव को युद्ध में हरा दिया था। पृथ्वीराज चौहान छह भाषाएं जानते थे जिनमें संस्कृत, प्राकृत, मागधी, पैशाची, शौरसेनी और अपभ्रंश भाषा शामिल है। इसके साथ ही उनको मीमांसा, वेदान्त, गणित, पुराण, इतिहास, सैन्य विज्ञान और चिकित्सा शास्त्र का भी ज्ञान था।
पृथ्वीराज चौहान की तरह ही उनकी सेना भी बलवान थी। इतिहासकारों के मुताबिक, 300 हाथी तथा 3,00,000 सैनिक पृथ्वीराज की सेना में शामिल थे। इनमें बड़ी संख्या में घुड़सवार भी शामिल थे। भारतीय इतिहास के सबसे प्रसिद्ध हिन्दू राजपूत राजाओं में से एक पृथ्वीराज चौहान का राज्य राजस्थान और हरियाणा तक फैला था। साहसी और युद्ध कला में निपुण सम्राट पृथ्वीराज चौहान बचपन से ही तीर कमान और तलवारबाजी पसंद करते थे। पृथ्वीराज चौहान को कन्नौज के राजा जयचंद की बेटी संयोगिता से प्रेम हो गया था।
इसके बाद वह संयोगिता को स्वयंवर से ही उठा ले गए और गन्धर्व विवाह किया। हालांकि संयोगिता के पिता राजा जयचंद और पृथ्वीराज चौहान की आपस में नहीं बनती थी। शादी के लिए जयचंद राजी नहीं थे। संयोगिता को उठा ले जाने के बाद जयचंद ने पृथ्वीराज से दुश्मनी मान ली।
चंदबरदाई और पृथ्वीराज चौहान बचपन के दोस्त थे। इसके बाद चंदबरदाई एक कवि और लेखक बने थे। उन्होंने महाकाव्य पृथ्वीराज रासो लिखा है। प्रथम युद्ध में सन 1191 में मुस्लिम शासक सुल्तान मुहम्मद शहाबुद्दीन गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को कई बार हराना चाहा, लेकिन उसको सफलता नहीं मिली। पृथ्वीराज चौहान ने युद्ध में मुहम्मद गौरी को 17 बार हराया। इसके अलावा वह इतने दरियादिली थे कि मुहम्मद गौरी को कई बार माफ कर दिया और छोड़ दिया।
अठारहवीं बार मुहम्मद गौरी ने जयचंद की मदद ली और युद्ध में पृथ्वीराज चौहान को हरा दिया। इसके बाद उन्हें बंदी बना लिया और अपने साथ लेकर चला गया। पृथ्वीराज चौहान और चंदबरदाई दोनों को ही कैद कर लिया गया। मुहम्मद गौरी ने सजा के तौर पर पृथ्वीराज की आखों को गर्म सलाखों से फोड़वा दिया।
मुहम्मद गौरी ने चंदबरदाई से पृथ्वीराज चौहान की अंतिम इच्छा पूछने के लिए कहा, क्योंकि चंदबरदाई और पृथ्वीराज आपस में मित्र थे। पृथ्वीराज चौहान शब्दभेदी बाण चलाने में माहिर थे। मुहम्मद गौरी को इस बात की जानकारी दी गई जिसके बाद उसने कला प्रदर्शन के लिए इजाजत दे दी।
पृथ्वीराज चौहान को जहां पर अपनी कला का प्रदर्शन करना था वहां पर मुहम्मद गौरी भी मौजूद था। पृथ्वीराज चौहान ने चंदबरदाई के साथ मिलकर मुहम्मद गौरी को मारने की योजना पहले ही बना ली थी। महफिल शुरू होने वाली थी तभी चंदबरदाई ने एक दोहा कहा- 'चार बांस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण, ता ऊपर सुल्तान है मत चूके चौहान'।
चंदबरदाई ने पृथ्वीराज चौहान को संकेत देने के लिए इस दोहे को पढ़ा था। इस दोहे को सुनने के बाद मोहम्मद गोरी ने जैसे ही शाब्बास' बोला। वैसे ही अपनी आंखों को गवा चुके पृथ्वीराज चौहान ने मुहम्मद गोरी को अपने शब्दभेदी बाण से मार दिया। हालांकि सबसे दुख की बात यह है कि इसके बाद पृथ्वीराज चौहान और चंदबरदाई ने दुर्गति से बचने के लिए एक दूसरे को मार दिया। ऐसे पृथ्वीराज ने अपने अपमान का बदला ले लिया। पृथ्वीराज के मरने की खबर सुनने के बाद संयोगिता ने भी अपनी जान दे दी।