15 करोड़ सालों तक दुनिया पर राज करने वाले डायनासोर में या तो बहुत बड़ी प्रजाति के जीव थे, या फिर आकार में बेहद ही छोटे थे। ऐसे में इस अंतर के सच को जानने के लिए अमेरिकी वैज्ञानिकों की एक टीम ने शोध किया। वैज्ञानिकों ने शोध में पाया कि डायनासोर ने छोटी शत्रु प्रजातियों को बाहर कर अपने आसपास की पारिस्थितिकी में बदलाव किया था।
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हाल ही में डायनासोर पर हुआ ये अध्ययन साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है। डायनासोर के समुदाय में किशोरों यानी टीनेजर्स का बहुत भरमार हुआ करता था। यानी किशोर डायनासोर अपनी प्रजाति में सबसे अधिक हिस्से में थे। इतना ही नहीं किशोर डायनासोर की अधिक जनसंख्या का समुदाय के लिए स्रोतों पर बहुत अधिक असर होता था।
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पूरे मेसोजोइक काल में जो 25 करोड़ साल से लेकर 6.6 करोड़ साल पहले तक का समय था, उस दौरान एक टन से अधिक भार के शरीर वाले डायनासोर की प्रजातियां 160 किलो से कम की प्रजातियों के मुकाबले बहुत ज्यादा थीं। वहीं कुछ वैज्ञानिकों का ये भी मत है कि विशाल डायनासोर का जीवन छोटे अंडों में से शुरू होता था, बड़े होने के दौरान वे अलग अलग स्रोतों का उपयोग करते होंगे जिससे उन्होंने अपने पारिस्थितिकी की अधिक जगह घेरी होगी।
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वैज्ञानिकों की इस मत की जांच के लिए शोधकर्ताओं ने दुनियाभर के जीवाश्मों आंकड़ों का अध्ययन किया, जिसमें 550 से ज्यादा डायनासोर प्रजातियां शामिल थीं। उन्होंने पाया कि मध्यम आकार के मांसाहारी की मौजूदगी में अंतर हर समुदाय में था, जिसमें टी रेक्स जैसे शिकारी जीव थे। इस अंतर को पाटने का काम युवा या किशोर डायनासोर करते थे। जूरासिक समुदाय में यह अंतर कम था, तो क्रिटेशियस समुदाय में यह अंतर बड़ा हो गया था।
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शोधकर्ताओं ने जीवाश्म रिकॉर्ड के आधार पर एक समय के युवा विशाल डायनासोर के भार का गुणा हर साल संभावित बचने वालों की संख्या से किया। ऐसे में दोनों कालों का वह अंतर खत्म हो गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि डायनासोर पर भी पारिस्थितिक पहलुओं को लागू करना अहम है।