भारत में मई-जून का महीना भीषण गर्मी के दौर वाला होता है, जहां देश के अधिकतर राज्यों का तापमान 40-45 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहता है। एक समय तो ऐसा भी आ जाता है जब एयर कंडीशनर भी राहत नहीं मिल पाती है। गर्मियों में उच्च तापमान के कारण होने वाले जोखिमों से बचने के लिए लोग ठंडे प्रदेशों में घूमने जाते हैं।
यहां पर मई-जून का महीना भी होता है नवंबर-दिसंबर जैसा ठंडा, चलाने पड़ते हैं हीटर
अंटार्टिका में पारा चलता जाता है माइनस में
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मई-जून के महीनों में भी दुनिया के कई देश ऐसे हैं जहां पर आग जलाए रखने, हीटर-ब्लोवर जैसे उपकरणों से भी लोगों को आराम नहीं मिल पाता है। कई-कई बार तो पारा गिरकर माइनस में भी चला जाता है। सा
साउथ पोल यानि अंटार्टिका के कई शहर ऐसे हैं जहां पर जून के महीनों में तापमान -20 से -30 डिग्री फारेनहाइट के नीचे चला जाता है। जिस समय आप भारत में गर्मी से तर-बतर हो रहे होते हैं उस समय यहां के निवासी ठंड से बचने के लिए हीटर-ब्लोवर जैसे उपकरणों का सहारा ले रहे होते हैं।
साउथ अमेरिका के कई शहरों का पारा भी चला जाता है नीचे
इसी तरह से साउथ अमेरिका का देश अर्जेंटीना भी मई-जून के महीने में भीषण ठंड की चपेट में रहता है। यहां पारा आमतौर पर 15-18 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहता है।
मदागास्कर आइलैंड का तापमान मई-जून के महीनों में 20 डिग्री सेल्सियस से भी कम हो जाता है। दक्षिण अमेरिकी देश पेरू, बोलीविया और ऑस्ट्रेलिया के कई हिस्से भी काफी ठंडे प्रदेशों में से माने जाते हैं जहां पर पारा अक्सर काफी कम रहता है। यही कारण है कि यहां से बड़ी संख्या में पर्यटक एशियाई देशों में घूमने आते हैं जिससे वह शरीर के तापमान को कुछ समय के लिए सामान्य कर सकें।